जबड़ा निर्माण व दांत प्रत्यारोपण अब एक बार में

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लखनऊ। अभी तक जबड़ा बनाने के बाद दांतों के प्रत्यारोपण करने की प्रक्रिया देर से होती थी, लेकिन अब एक बार में ही जबड़ा बनाने के लेकर दांतों का प्रत्यारोपण किया  जा सकेगा है। इस नयी इंट्रा ओरल वेल्डिंग  तकनीक की जानकारी प्रो. जीके गुप्ता ने किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय में आयोजित कार्यक्रम में दी। यह कार्यक्रम प्रोस्थोडाटिक्स विभाग की ओर से आयोजित किया गया था। उन्होंने बताया कि  इस तकनीक से जबड़ा व दांत लगाने के बाद खाद्य पदार्थो को आसानी से चबाया भी जा सकता है।

किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के दंत संकाय में आयोजित कार्यशाला में डा.जीके गुप्ता ने कहा कि मूल रूप से दंत प्रत्यारोपण को दो चरणों में लगाया जाता है। जहां प्रत्यारोपण के तीन से छह महीने की अवधि के बाद उस पर ओसियोइंटीग्रेशन के बाद दांत लगाये जाते है। तत्काल इंम्प्लाट लगाने में सबसे बड़ी चुनौती शल्य क्रिया के दो दिनों के अंदर प्रत्यारोपण करना मुश्किल है,परन्तु इंट्रा ओरल वेल्डिंग तकनीक से एक दिन में जबड़ा व दांत को बनाया जा सकता है। इसमें टाइटेनियम का प्रयोग किया जाता है यह कृत्रिम अंग बनाने मे मदद करता है।यह आसानी से मरम्मत करने लायक तथा टिकाऊ भी होता है।

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