लखनऊ। तेज गर्मी में मरीज वार्डो तक शिफ्ट करने के दौरान स्ट्रेचर पर गर्मी के कारण बेहाल हो जाते है। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में ट्रामा सेंटर से गांधी वार्ड तक या सर्जरी विभाग तक जाने में मरीज के साथ तीमारदार स्ट्रेचर खींचने में परेशान हो जाते है।
अक्सर एम्बुलेंस न मिलने पर करीब एक किलोमीटर दूर लिम्ब सेंटर तक मरीज स्ट्रेचर पर मजबूरी में ले जाया जाता है। हालांकि मरीजों के शिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस तैनात है, लेकिन मरीजों की वेंटिग लगी रहती है। ट्रामा सेंटर प्रभारी का कहना है कि मरीजों की शिफ्ट करने के लिए एम्बुलेंस का ही प्रयोग किया जाता है, लेकिन कुछ तीमारदार एम्बुलेंस मिलने में देरी के कारण मरीज को खुद एम्बुलेंस से ले जाते है।
ट्रामा सेंटर में मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने के लिए लगभग 13 एम्बुलेंस लगी है, लेकिन इनमें पुरानी होने के कारण कुछ खराब रहती है। वर्तमान में लगभग 8 एम्बुलेंस चल रही है, लेकिन दावा किया जाता है यह लगाातार चल रही है। फिर भी मरीज को तीमारदार स्ट्रेचर पर ले जाना मजबूरी हो जाती हंै। तेज धूप में स्ट्रेचर पर गांधी वार्ड, सर्जरी या अन्य वार्ड ले जाने में मुश्किल भरा काम होता है।
स्ट्रेचर पर तेज धूप में मरीज बेहाल हो जाता है आैर उन्हें ले जाने में दिक्कत होती है। तीमारदारों का आरोप है कि एम्बुलेंस के लिए वेंटिग चलती है आैर वार्ड तक मरीज को शिफ्ट करने में देर हो जाती है। इस बारे में ट्रामा सेंटर प्रभारी डा. हैदर अब्बास का कहना है कि मरीज को शिफ्ट करने के लिए आठ एम्बुलेंस चल रही है। उसी से उन्हें शिफ्ट किया जाता है। फिर भी कोई अगर स्ट्रेचर से जाता है तो वह तीमारदार अपनी सहमति से ले जाता है।