लखनऊ। 2 साल का मासूम लगभग एक दर्जन लोहे की पिन को शरीर में समेटे मुस्कुराते हुए जिंदगी जी रहा है, उसके मां-बाप दवाओं के साथ दुआओं के भरोसे दिन काट रहे हैं कि कब उनके लाल के शरीर से निकलना बंद होगी। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की पीडियाट्रिक सर्जरी इलाज करा रहे इस मासूम के शरीर से डॉक्टर एस एन कुरील कुछ सुईयां निकाल चुके हैं, उनका कहना है बाकी सुई शरीर के फेफड़े नंगो में घुसी पड़ी है उन्हे निकालने से बच्चे को दिक्कत हो सकती है।
रायबरेली निवासी इस मासूम हार्दिक के जन्म के बाद उसकी मां शरीर से मालिश कर रही थी तब पहली सुई अपने आप सभी से निकलने लगी थी उसे पकड़ कर बाहर निकाल लिया था लेकिन बच्चे को कोई तकलीफ नहीं हुई थी। उसके बाद 3-4 सुई निकली। डर कर डॉक्टर को दिखाया तो अजूबा बताते हुए लखनऊ रेफर कर दिया। कुछ लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि सुईयां शरीर में डाली जाती है। पुलिस में आकर डराया-धमकाया लेकिन कोई बात ना बनी अपने मासूम को बचाने के लिए माता पिता केजीएमयू पहुंचे तो यहां भी डॉक्टरों ने इलाज तो शुरु किया, लेकिन सुईयां शरीर में डाले जाने का शक किया पुलिस के माध्यम से उच्च स्तरीय जांच कराई गई परंतु नतीजा शून्य ही रहा।
यहां डॉक्टरों ने सिर में जा रही सुई की जांच के लिए न्यूरोलॉजी विभाग से भी मदद ली। सर्जरी कर कुछ सुईयां निकाली गई, एक 2 महीने में आने का निर्देश देकर वापस कर दिया गया। उसके पिता बताते हैं तब से अब तक 3-4सुई निकल चुकी है। मासूम हार्दिक बड़ा हो रहा है और मां बाप को अब चिंता सताने लगी है की शरीर में पड़ी सुईया उसके लाल को कहीं बेहाल न कर दे। माता पिता आज एक बार फिर केजीएमयू आए और जांच करा कर वापस चले गए अब उनके लिए भी शरीर में बन रही सुई अबूझ पहेली है तो डॉक्टरों के लिए यह एक एक साजिश जैसे कोई साबित नहीं कर पाया है पर मासूम सुई के साथ ही जी रहा है ।















