डॉक्टरों और पैरामेडिकल पर मरीजों के रिश्तेदारों की ओर से बढ़ती मारपीट की घटनाए बढ रही है। इससेनिपटने के लिए दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टर आत्मरक्षा प्रशिक्षण के तहत मार्शल आर्ट सीखने जा रहे है। ताकि मारपीट की घटनाओं में सेल्फडिफेंस कर सके।
एम्स ने लिया निर्णय,15 मई से शुरू होगी क्लास :
जानकारी के अनुसार एम्स के रेजिडेंट डॉक्टर संघ के अध्यक्ष डा विजय कुमार का कहना है कि मारपीटी की घटना घटे आैर डाक्टर पीटा जाए उससे निपटने की तैयारी पहले ही कर ली जानी चाहिए। इस लिए डाक्टरों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण इसी सोच के साथ देने का फैसला लिया गया है। प्रशिक्षण देने के लिए मार्शल आर्ट में ब्लैक बेल्ट और ताइक्वांडो के विशेषज्ञ रखे जाएंगे। इसके लिए अस्पताल परिसर में रोजाना प्रशिक्षण क्लासेज लगंगे। अस्पताल प्रशासन ने इसकी अनुमति दे दी है। ये प्रशिक्षण कक्षाएं 15 मई से शुरू हो जाएंगी।
दिल्ली के सभी अस्पतालों के रेजिडेंट डाक्टरों के संघ के अध्यक्ष पंकज सोलंकी के अनुसार राजधानी में डाक्टरों पर हमले की घटनाओं में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। गत एक साल के दौरान एम्स और अंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों पर हमले की चार-चार घटनाएं हो चुकी हैं। लोक नायक जयप्रकाश, गुरु तेग बहादुर और आचार्य भिक्षु अस्पताल में भी ऐसी तीन-तीन घटनाएं हुई हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि बिना किसी गलती के उन पर हमले किया जाना न सिर्फ अपमानजनक होता है। एक समय ऐसा था जब भगवान के बाद दूसरा दर्जा डॉक्टरों को दिया जाता था लेकिन आजकल हालात बदल गए हैं। छोटी छोटी बातों पर मरीजों के तीमारदार मरने मारने पर उतर आते हैं। अस्पताल में कोई सुविधा,कोई उपकरण उपलब्ध न हो तो इसके लिए डाक्टरों को कसूरवार ठहरा दिया जाता है। यह सरासर गलत है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अस्पतालों में तीमारदारों के प्रवेश को निर्धारित करना भी आवश्यक हंै ताकि मरीज को सही इलाज आैर मारपीट से बचा जा सके।















