किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के दंत संकाय में इन दिनों दवाओं की भारी किल्लत है। यहां इलाज के लिए आने वाले मरीजों को मजबूरीवश महंगे दामों में दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ रही हैं। डाक्टर मरीजों को बाहर से दवाएं खरीदने की पर्ची थमा रहे हैं। यह स्थिति पिछले सप्ताह से चल रही है। फिर भी केजीएमयू प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा है। इन दिनों हालत यह है कि दंत संकाय में मरीजों को केवल पैरासीटामाल और बोराफिन ही दवा ही मिल रही है। एंटीबायोटिक, दर्द निवारक, आयरन, कैल्सियम, विटामिन आदि की भी दवाएं गायब हैं।
जबकि नियम यह है कि अगर दवा कंपनी समय से दवाओं की आपूर्ति नहीं करती है तो उसे ब्लैक लिस्टेड किया जाये। इसके बाद वह दवा कंपनी किसी भी सरकारी अस्पताल में दवा आपूर्ति नहीं कर सकती है लेकिन केजीएमयू प्रशासन के लचर रवैये के कारण दवा कंपनियां दवाई आपूर्ति में मनमानी कर रही हैं। केजीएमयू के नव नियुक्त कुलपति प्रो0 एमएलबी भट्ट की ओर से चिविवि की व्यवस्थाओं में भारी सुधार होने का दावा किया जा रहा है लेकिन जमीनी स्तर पर अभी कुछ परिवर्तन हुआ दिख नहीं रहा है। प्रो0 एमएलबी भट्ट द्वारा कुलपति को चार्ज लिये हुए 15 दिन हो गये हैं लेकिन चिकित्सक व अस्पताल कर्मी अभी भी पुराने ढ़र्रे पर चल रहे हैं।
दंत संकाय की मैक्सिलोफेसियल सर्जरी की प्रोफेसर व दंत संकाय की फैकल्टी इंचार्ज और मीडिया प्रभारी डा. विभा सिंह ने बताया कि चिकित्सा अधीक्षक से इस संबंध में बातचीत हो चुकी है। दो दिन में दवाओं की आपूर्ति सुनिश्चित हो जायेगी।















