लखनऊ। राजधानी से महज 30 किलोमीटर दूर बक्शी का तालाब स्थित राम सागर मिश्र 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में मरीजों के इलाज के नाम पर महज दिखावा किया जा रहा है। हालात यह है कि गम्भीर मरीजों को अल्ट्रासाउण्ड के लिए एक महीने बाद की तारीख दी जा रही है। जब मरीज इस बात की शिकायत मुख्य चिकित्सा अधीक्षक से करता है। तो उसका एक्स-रे करा दिया जाता है। इतना ही नहीं इस चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाली गरीब जनता को चिकित्सक धड़ल्ले से बाहर की दवा लिख रहे ।
केस-1
बाराबंकी निवासी प्रवेश कुमार (28) को यूरीन न होने की समस्या के चलते परिजन अस्पताल लेकर पहुंचे थे। वहां पर ओपीडी के कमरा नम्बर -2 में चिकित्सक ने देखने के बाद अल्ट्रासाउण्ड जांच कराने को कहा। लेकिन अल्ट्रासाउण्ड कक्ष में मौजूूद कर्मचारियों ने मरीज को एक मरीने बाद की तारीख देकर चलता कर दिया।
केस-2
बक्शी का तालाब निवासी रोहित (15) को पेट में दर्द की समस्या को देखते हुए चिकित्सक ने अल्ट्रासाउण्ड जांच कराने की सलाह दी। लेकिन अस्पताल में रोहित को भी जांच के लिए एक महीने बाद आने को कहा गया। इस पर रोहित के पिता का कहना था कि लड़का पिछले दो दिनों से पेट दर्द की समस्या से जूझ रहा है। सोमवार को जब अस्पताल खुला तो चिकित्सक को दिखाया अब जांच नहीं हो पा रही है। अब जांच बाहर से करानी पडे़गी।
अल्ट्रासाउण्ड नहीं, तो कराओ एक्स-रे
प्रवेश व रोहित शरीखे मरीज तो बानगी मात्र है। सोमवार के दिन दो दर्जन से अधिक मरीजों को बिना अल्ट्रासाउण्ड जांच के ही वापस लौटना पड़ा। इसके अलावा जो मरीज अपने गम्भीर होने की दुहाई देते हुये अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक के पास पहुंचे। तो उन मरीजों का मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने अल्ट्रासाउण्ड की जगह यह कह कर एक्स-रे करा दिया कि अल्ट्रासाउण्ड में कुछ खास निकलेगा नहीं, एक्स-रे में बीमारी का पता चल जायेगा।
चिकित्सक नदारद बैंरग लौटे मरीज
राम सागर मिश्र 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय में कमरा नम्बर 9 तथा दन्त चिकित्सक की ओपीडी छोड़ और किसी भी चिकित्सक की ओपीडी सुबह 9 बजे से पहले नहीं शुरू होती है । यह कहना है इलाज के लिए अस्पताल आये बक्शी का तालाब निवासी शकील अहमद तथा सुनील का । इन मरीजों का कहना था कि वो अक्सर इलाज के लिए अस्पताल आते हैं। लेकिन यहां पर डाक्टर 9 बजे से पहले नहीं देखते । वहीं मरीजों से ओपीडी में मौजूद कर्मचारी यह कहते नजर आते है कि डाक्टर साहब अभी भर्ती मरीजों को देख रहे हैं। यही नहीं चिकित्सक के अवकाश पर होने की सूचना भी नोटिस बोर्ड पर नहीं चिपकाया जाता है। जिसके चलते मरीज ओपीडी के सामने घंटो बैठने के बाद बिना इलाज के बैंरग लोट जाते है। जानकीपुरम निवासी कमलेश हाथ की हड्डी में फैक्चर हो जाने के चलते कमरा नम्बर 11 में आर्थो सर्जन को दिखाने पहुंचे थे। लेकिन 11 बज जाने के बाद भी चिकित्सक नहीं आये । तो उन्होंने इसकी वजह जाननी चाही तो पता चला कि डाक्टर साहब आज छुट्टी पर हैं। कमलेश की तरह ही सुनील,निषा,राजदुलारी ,सुष्मा सिंह समेत कई मरीज बिना चिकित्सक दिखाये ही लौट गये।
चिकित्सक लिख रहे बाहर की दवा
राम सागर मिश्र संयुक्त चिकित्सालय में इलाज के लिए आने वाले ज्यादातर मरीज ग्रामीण परिवेश के होते है। उनकी आर्थिक स्थिति भी काफी खस्ताहाल ही दिखाई पड़ती है। इसके बाद भी इस अस्पताल के कुछ चिकित्सक उन गरीब मरीजों को बाहर की दवा लिखने से बाज नहीं आते। मालती देवी (60) ने कमरा नम्बर 12 में मौजूद चिकित्सक को दिखाया। जिस पर चिकित्सक ने अस्पताल की दवाओ के साथ ही तीन दवायें बाहर की लिख दी। मालती देवी के गुजारिश के बाद चिकित्सक ने कहा कि अस्पताल मे ये दवा नहीं मिलती है। इसके अलावा शिवबहादुर सिंह को भी चिकित्सक ने बाहर की दवा लिख चलता कर दिया।
अल्ट्रासाउण्ड करने वाले चिकित्सक छुट्टी पर थे। जिसके चलते जांच में समस्या आ रही थी। मरीजों के भारी तादात के चलते एक महीने बाद की तारीख देनी पड़ रही है। डाक्टरों द्वारा बाहर की दवा लिखी जाने की जानकारी नहीं है,यदि कोई चिकित्सक बाहर की दवा लिखता है तो गलत है,जांच करायी जायेगी।
डाॅ.जावेद हयात,मुख्य चिकित्सा अधीक्षक,राम सागर मिश्र 100 शैय्या संयुक्त चिकित्सालय















