लखनऊ। पीजीआई को ट्रामा सेंटर हैंडओवर करने की प्रक्रिया तक किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय मरीजों का इलाज करता रहेगा। भर्ती होने वाले मरीजों के इलाज में कोई कोताही नहीं बरती जाएगी। इसके अलावा अगर ट्रामा सेंटर टू के संचालन में अगर पीजीआई मदद मांगता है तो उसकी मदद की जाएगी।
यह जानकारी किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एम एल बी भट्ट ने दी। उन्होंने कहा कि मरीजों का इलाज कैसे बंद हो सकता है। पीजीआई जब तक मरीजों को चिकित्सा सुविधा देने के लिए तैयार नही होता है, तब तक मरीजों को भर्ती करके इलाज पहले की तरह ही दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अगर पीजीआई केजीएमयू से मरीजों के इलाज में मदद मांगता है तो नियमानुसार उसकी मदद की जाएगी। बताते चले कि पीजीआई के पास आर्थोपैडिक,जनरल सर्जन व फिजीशियन नही है। इसके अलावा न्यूरो सर्जन भी कम ही है। कार्डियक यूनिट भी शुरू करने में दिक्कत होगी। इस लिए पीजीआई ट्रामा सेंटर टू को अंग प्रत्यारोपण यूनिट बनाने की तैयारी में है।
बताया जाता है कि अभी पीजीअाई को ट्रामा सेंटर टू को चलाने के लिए डाक्टर फैकल्टी, पैरामेडिकल के अलावा बजट व वेतन के लिए बजट चाहिए होगा। अगर सभी कार्य समय से होते रहे तब भी छह महीने से आठ महीने तक लग सकते है। तब तक केजीएमयू मरीजों की भर्ती बंद करता है या नहीं। इसको भी देखना होगा। अगर छह महीने से ज्यादा केजीएमयू को संचालन करना पड़ता है तो उसे तब तक का बजट दिया जाएगा कि नहीं यह भी अभी तय नहीं हो पाया है। फिलहाल मरीजों का इलाज होगा आैर उसे लौटाया नहीं जाएगा।















