लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के ट्रामा सेंटर टू को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान को वापस करने का निर्णय लिया गया है। लगभग डेढ़ साल चलने के बाद भी संसाधनों व बजट के अभाव में ट्रामा सेंटर टू का आर्थिक भार केजीएमयू पर ही पर पड़ रहा था। अब इसका संचालन पीजीआई करेगा लेकिन करेंगा कैसे यह भी यक्ष प्रश्न है। पीजीआई के पास न तो आर्थोपैडिक, जनरल सर्जन व फि जीशियन विशेषज्ञ डाक्टर है आैर न ही पैरामेडिल व स्टाफ नर्स है। उसको चलाने के लिए या तो पदों का सर्जन करने के लिए शासन से अनुमति लेनी होगी आैर बजट की मांग करनी होगी। अगर समय पर बजट नहीं मिला तो पीजीअाई के लिए भी ट्रामा सेंटर संचालन टेढ़ी खीर होगी।
केजीएमयू प्रशासन ने पीजीआई के लिए निर्मित ट्रामा सेंटर टू के संचालन के लिए लगभग 25 करोड़ की मांग की थी। जब कि पीजीअाई प्रशासन दो गुना से ज्यादा बजट की मांग संचालन करने के लिए मांग रहा था। केजीएमयू ने ट्रामा सेंटर टू के संचालन के लिए वेंटिलेटर से लेकर सेटेलाइट ब्लड बैंक का भी व्यवस्था कर दी थी। आर्थोपैडिक, जनरल सर्जरी के आपरेशन भी किये जा रहे थे। यहां पर गंभीर हालत के मरीजों को वापस केजीएमयू के ट्रामा सेंटर टू में एम्बुलेंस से भेज दिया जाता था। केजीएमयू से लगभग 21 किलोमीटर दूर ट्रामा सेंटर टू का संचालन करते हुए ट्रामा सर्जरी विभाग प्रमुख डा. संदीप तिवारी जिम्मेदारी को बखूबी निभायी थी।
यहंा मरीजों की सर्जरी से लेकर पैडियाट्रिक आर्थोपैडिक व स्पोर्ट इंजरी की ओपीडी भी चलने लगी थी। सेंटर के लिए पदों का सृजन शासन ने कर दिया था। इसके अलावा मरीजों को पहले 24 घंटे निशुल्क दिया जा रहा था। पर इस इलाज के लिए शासन ने बजट ही नहीं दिया तो निशुल्क इलाज बंद हो गया। अब पीजीआई इसका संचालन करने लिए रणनीति तय करेंगा। इस रणनीति को तैयार करने के लिए पीजीआई प्रशासन को केजीएमयू की मदद लेनी होगी या नये पदों का सृजन करना होगा। ऐसे में वेतन से लेकर बजट तक 150 सौ करोड़ के पार चला जा सकता है। हालांकि ट्रामा सेंटर वापस आना खुशी की लहर है तो चलाना भी टेढी खीर से कम भी नही है।















