लखनऊ। एक बड़ी चुनौती को स्वीकारते हुए और दुर्लभतम सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम देकर बैंगलुरु के अग्रणी ऑन्कोलॉजी सर्जन डॉ संदीप नायक ने 64 वर्षीय कैंसर रोगी को जिंदगी की नई उम्मीद दी है। उस मरीज के पेट के कैंसर का इलाज करने के लिए डॉ संदीप नायक ने 12 घंटे लंबी सर्जरी की है जो भारतीय ऑन्कोलॉजिकल सर्जरी के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होगी। भारत में अब तक ऐसी 15 से ज्यादा सर्जरी नहीं हुई हैं। दुनिया भर के ऑन्कोलॉजिस्ट सर्जनों को यह काम मुश्किल लगता है क्योंकि इस सर्जरी के लिए जो कौशल चाहिए और जो समय लगता है वो बहुत ज्यादा है।
64 साल के श्री सिंह (गोपनीयता बनाए रखने के लिए नाम परिवर्तित) को पेरियमपुलरी कार्सिनोमा होने का पता लगा, जो दूसरी स्टेज पर पहुंच चुका था; डॉक्टरों ने उन्हें ’पैंक्रियाटिकोडुओडेनेक्टॉमी (पीडी) नामक प्रक्रिया कराने की सलाह दी। पेरियमपुलरी कार्सिनोमा में ऊपरी जठरांत्रीय मार्ग के बड़े हिस्से (जिसे ऐमप्युला ऑफ वैटर कहते हैं), लोअर कॉमन बाइल डक्ट, डुओडेनम और हैड ऑफ दि पैंक्रियाज़ में कैंसरकारी कोशिकाओं की बढ़त हो जाती है। इसका इलाज करने के लिए हैड ऑफ दि पैंक्रियाज़, डुओडेनम, पेट के कुछ हिस्से व गॉल ब्लैडर के भाग को निकाल दिया जाता है और फिर पाचन तंत्र को बहाल करने के लिए इन्हें फिर जोड़ दिया जाता है – इसी प्रक्रिया को चिकित्सीय भाषा में पैंक्रियाटिको-डुओडेनेक्टॉमी या पीडी कहा जाता है।
अधिकांश सर्जन ओपन सर्जरी का विकल्प अपनाते हैं –
पेट की सर्जरी में इसे तकनीकी तौर पर सबसे चुनौतीपूर्ण ऑपरेशनों में से एक माना जाता है। पैंक्रियाटिको-डुओडेनेक्टॉमी को अब भी जोखिम भरा ऑपरेशन माना जाता है। मेडिकल टेक्नोलॉजी में प्रगति के बावजूद अधिकांश सर्जन अब भी लैपरोस्कोपिक या रोबोटिक पैंक्रियाटिकोडुओडेनेक्टॉमी करने से बचते हैं और इसके बजाय ओपन सर्जरी का विकल्प अपनाते हैं। लेकिन समय पर डॉ नायक से सलाह होने से ’टोटली रोबोटिक पैंक्रियाटिको-डुओडेनेक्टॉमी’ की सफलता की कहानी लिखी जा सकी, इसे ’व्हिप्पल्स’ प्रक्रिया भी कहते हैं। सर्जरी के इस कठिन कार्य का जिम्मा लेते हुए डॉ संदीप नायक और कुछ सर्वश्रेष्ठ डॉक्टरों वाली उनकी टीम ने इस कड़ी परीक्षा को पास कर लिया। उन्होंने ऐसे मरीजों को उम्मीद की किरण दी है जिनके पास केवल ओपन सर्जरी का ही विकल्प रह गया था।
कैंसर की रोबोटिक व लैपरोस्कोपिक सर्जरी के विशेषज्ञ डॉ संदीप नायक कहते हैं, ’’पूरी तरह रोबोटिक पैंक्रियाटिको-डुओडेनेक्टॉमी सर्जरी करना बहुत चुनौतीपूर्ण होता है। ऐसे मामले एक सर्जन के विकास में महत्वपूर्ण रोल अदा करते हैं। हमें खुशी है हम यह सर्जरी कर सके। मेरी विशेषज्ञता और अनुभव केवल तभी अर्थपूर्ण होंगे जब मैं मेडिकल टेक्नोलॉजी का सर्वोत्तम लाभ अपने मरीजों को दे सकूं। ओपन सर्जरी के मुकाबले रोबोटिक सर्जरी के बहुत से तकनीकी व चिकित्सीय लाभ हैं। रोबोटिक सर्जरी के बाद जटिलताएं काफी कम होती हैं, अस्पताल में कम वक्त के लिए ठहरना पड़ता है और ऑपरेशन के बाद होने वाला दर्द भी बहुत घट जाता है।’’
श्री सिंह अब अच्छी तरह स्वास्थ्य लाभ कर रहे हैं, उन्होंने अपना अनुभव साझा करते हुए कहा, ’’मुझे बताया गया कि परम्परागत ओपन सर्जरी ही एकमात्र इलाज बचा है। पैंक्रियाटिको-डुओडेनेक्टॉमी की पेचीदगी के मद्देनजर यह जोखिम भरा था। शुरु में फैसला करना बेहद कठिन था, बहुत से किंतु-परंतु इसमें शामिल थे। लेकिन शुक्र है कि हमने रोबोटिक सर्जरी के लिए अपना मन बना लिया। मुझे खुशी है कि हमने डॉ नायक से मश्विरा किया और हमें ओपन सर्जरी का विकल्प मिल गया।’’















