लखनऊ। चिकित्सा सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए रेफरल सिस्टम को लागू करना होगा। इसके लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र से लगाकर ट्रामा सेन्टर तक संदर्भन की व्ययस्था का संचालन ठीक तरीके से नहीं हो रहा है, जबकि नेशनल हेल्थ पॉलिसी के आर्टिकल तीन में रेफरल सिस्टम का प्रमुखता से उल्लेख किया गया है। इस व्यवस्था को जमीनी स्तर पर लागू करने के लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी आैर मुख्य चिकित्सा अधीक्षक की जवाब देही सुनिश्चित करनी होगी, जिसका जमीनी हकीकत में अता-पता तक नहीं है। यह बात मेयो इंस्टीट¬ूट ऑफ मेडिकल साइंसेस के चिकित्सा अधीक्षक एवं अस्सिटेंट प्रोफेसर जनरल सर्जरी विभाग के डा. आरबी सिंह ने शुक्रवार को रिवर बैंक कालोनी स्थित आईएमए भवन में आयोजित सीएमई में ‘इमरजेंसी एण्ड ट्रामा केयर स्पेशल रिफ्रेंस टू नीड फॉर वेल डेवलेप्ड रिफरल सिस्टम” विषय पर कही।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में रेफरल सिस्टम व्यवस्था सिर्फ कागजों तक सीमित है, लेकिन सही तरीके से लागू नहीं है। इसके कारण पीजीआई, केजीएमयू में उन मरीजों की भीड़ लगी हुई है, जिनका उपचार प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र आैर सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र या राजकीय अस्पतालों में हो सकता है। ऐसी हालत में उन मरीजों को उपचार नहीं मिल पाता, जिनका वास्तव में सुपर स्पेशियलिटी चिकित्सा की जरूरत है। उन्होंने कहा कि अगर प्रदेश में चिकित्सा व्यवस्था बेहतर बनानी है तो रेफरल सिस्टम के अतिरिक्त मैन पॉवर आैर संसाधनों को पर्याप्त मात्रा में जुटना पड़ेगा।
पीजीआई में क्रिटिकल केयर विभाग के डा. संदीप साहू ने ट्रामा उपचार के बाद में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया। इसके अलावा केजीएमयू के सर्जरी विभाग के प्रोफेसर डा. एचएस पाहवा, डा. मनोज कुमार अस्थाना आैर जेडी रावत ने चिकित्सा के विभिन्न मुददों को विस्तार से बताया। आईएमए के अध्यक्ष डा. पीके गुप्ता ने बताया कि शनिवार को आईएमए डाक्टर्स की ऑनलाइन डायरेक्ट्री का लोकार्पण किया जाएगा।















