लखनऊ। अकारण उसादी, गुस्सा, चिड़चिड़ापन आैर खालीपन रहने की भावना। यह लक्षण अवसाद के होते हैं। आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि विश्व भर में 350 मिलियन लोग अवसाद से पीड़ित हैं। अभी हाल में हुए एक राष्ट्रीय मानसिक सर्वे 2015-16 में देखा गया है कि 20 में 1 भारतीय को अवसाद है आैर वर्ष 2012 में 288000 लोगों ने आत्महत्या की। इसलिए अवसाद के प्रति जागरूक रहने की जरूरत है। यह बात रिचमण्ड फैलोशिप सोसाइटी इण्डिया की लखनऊ इकाई की सचिव डा. शशी राय ने शनिवार को शनिवार को रिवर बैंक कालोनी स्थित आईएमए भवन में आयोजित कार्यशाला का संचालत करते हुए कही।
आईएमए भवन में कार्यशाला –
कार्यशाला में मुख्य अतिथि पीआरसीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर अमिताभ लाल, मुख्य वक्ता केजीएमयू के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डा. अनिल निशचल आैर संस्था के अध्यक्ष डा. एके अग्रवाल सहित कई लोगों ने मानरोग पर विचार व्यक्त किये। इस बात पर कई वक्ता एक मत थे कि अगर अवसाद का सही इलाज नहीं किया गया तो घातक परिणाम हो सकते हैं। इस समस्या की व्यापकता आैर गंभीरता को देखते हुए इस वर्ष के विश्व स्वास्थ्य दिवस का मुख्य विषय ‘अवसाद-चुप्पी तोड़े! बात करें”।















