लखनऊ। कोरोना मरीज की भर्ती को लेकर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन की बड़ी लापरवाही सामने आयी है। ट्रामा सेंटर में कोरोना पाजिटिव आने पर मरीज को एम्बुलेंस से आइसोलेशन वार्ड के बाहर छोड़ दिया गया। गंभीर हालत में कोरोना संक्रमित मरीज करीब तीन घंटे तक जमीन में पड़ा रहा। इस दौरान काफी संख्या में लेाग मरीज व पास में बैठे तीमारदारों से जमीन में लेटने का कारण पूछने के लिए करीब चले जाते, जब उन्हें पता चलता कि कोरोना संक्रमित मरीज है तो दूर भाग कर खड़े हो जाते। काफी देर बाद केजीएमयू प्रशासन तक जब इसकी जानकारी पहुंची तो मरीज को आनन-फानन में आइशोलेशन वार्ड में भर्ती किया गया।
सुल्तानपुर निवासी यशवंत प्रताप यादव किडनी के मरीज है आैर डायलिसिस के लिए केजीएमयू ट्रामा सेंटर पहुंचे थे। इन्हें होल्डिग एरिया में भर्ती करके इलाज शुरू करने के साथ ही कोरोना जांच के लिए भेजा गया। जांच में आज कोरोना पाजिटिव पाये गये, तो तत्काल ट्रामा सेंटर से आइशोलेशन वार्ड के लिए एम्बुलेंस से भेज दिये गये। एम्बुलेंस चालक मरीज को आइशोलेशन वार्ड के बाहर तक तो पहुंचा, लेकिन मरीज यशवंत को बाहर उतार कर चला गया। मरीज यशवंत खुद चलकर अंदर नही जा सकता था। ऐसे में एम्बुलेंस चालक आइशोलेशन वार्ड की कर्मियों की मदद से स्ट्रेचर से अंदर वार्ड तक पहुंचाना था। लेकिन उसने ऐसा नही किया आैर बाहर सड़क पर ही छोड़ कर चला गया। मरीज की पत्नी व चाचा तीमारदार को बताया कि अंदर से उन्हें लेने के लिए कोई आएगा।
चाचा ने बताया कि दो बजे से शाम के पांच बज गये आैर कोई उन्हें लेने नहीं आया। इस बीच काफी संख्या में तीमारदार व अन्य लेाग गुजरे तो कौतुहल वश मरीज के करीब जाकर तीमारदारों को जमीन में लेटने का कारण पूछ लेते। जब उन्हें पता चलता कि कोरोना संक्रमित मरीज है तो भाग कर दूर खड़े होकर मुंह पर कपड़ा लगा लेते। इस बीच वहां से सामाजिक संस्थान की प्रमुख वर्षा वर्मा आैर अध्यक्ष दीपक महाजन एक मरीज को दवा देने जा रहे थे, तो उन्होंने भी मरीज से जानकारी ली तो यह लापरवाही देखकर उन्होंने केजीएमयू के अधिकारियों को सूचित किया। तब आनन-फानन में मरीज को आइशोलेशन वार्ड में शिफ्ट किया गया। ट्रामा सेंटर के प्रवक्ता डा. संदीप तिवारी का कहना है कि मरीज कोरोना पाजिटिव आने पर एम्बुलेंस से शिफ्ट करने के निर्देश दिये गये थे।












