2 घंटे में भर्ती का दावा, 48 घंटे में भी नहीं पूरा होता

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लखनऊ। मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद भी स्वास्थ्य विभाग अधिकारी पालन नही कर पा रहे है। मरीजों की कोरोना पॉजिटिव आने बाद उन्हें कोविड 19 हॉस्पिटल में शिफ्ट किये जाने के दावे हवा हवाई साबित हो रहे हैं। नॉन कोविड निजी अस्पतालो में इलाज के दौरान जांच में कोरोना संक्रमित मरीजों को स्वास्थ्य विभाग दो घंटे तो दूर दो दिन तक शिफ्ट नही करा पा रहा है। ऐसे में संक्रमण फैलने की आशंका से निजी अस्पतालों ने उनका इलाज भी बंद कर दिया जा रहा है। निजी अस्पताल कि प्रबंधन का आरोप है कि लगातार सीएमओ कंट्रोल रूम पर काल करके मरीज को शिफ्ट करने के लिए कहा जा रहा है लेकिन कहीं भी कोई सुनवाई नहीं हो रही है।

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निराला नगर के विवकानंद अस्पताल में भर्ती अशोक 42 वर्षीय मरीज लिवर में संक्रमण की वजह से 15 जुलाई को भर्ती हुए थे। डॉक्टर ने इलाज शुरू करने के साथ ही कोरोना जांच करवाया तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ गयी। 16 जुलाई से विवकानंद प्रशासन ने सीएमओ डॉ नरेंद्र अग्रवाल व कंट्रोल रूम में फोन करके मरीज को कोविड हॉस्पिटल में लगातार शिफ्ट करने के लिए कहा। मगर कोई सुनवाई नही हो रही है। विवकानंद अस्पताल के मुताबिक, उनके यहां सामान्य बीमारी के भर्ती हुए दो मरीज कोरोना संक्रमण मिलने के बाद चार दिन से पड़े हैं। उन्हें स्वस्थ्य विभाग कोविड अस्प्ताल में शिफ्ट नही करवा रहा है। कमोबेश यही हाल कई अन्य निजी अस्पतालों का भी है। जहाँ पर मरीज के पॉजिटिव आने पर उन्हें स्वस्थ्य विभाग कोविड-19 हॉस्पिटल में शिफ्ट नही करवा रहा है। ऐसे मरीजों की संख्या करीब दस से अधिक है, जो निजी अस्पताल से कोविड अस्प्ताल जाने का इंतजार कर रहे हैं।

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