​पीजीआई में क्रिटिकल केयर में उपचार मिलना आसान नहीं

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लखनऊ । संजय गांधी पीजीआई के क्रिटिकल केयर मेडिसन में बीस बेड के लिए तीन सौ से अधिक मरीजों की वेटिंग चल रही है। बेड पाने के लिए सांसद, मंत्री, विधायक आैर वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से परिजन सिफारिशें लगवा रहे हैं लेकिन लम्बी वेटिंग के चलते संस्थान प्रशासन भी मदद करने में असर्मथ नहीं है। 

इसके चलते सीसीएम में फोन मिलाने ही एक जवाब मिलता कि बेड उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में मरीज के तीमारदारों को निराश होना पड़ता है। परिजनों का कहना है कि निजी अस्पतालों की यह हालत है कि रोजाना 40 से 50 हजार रुपये तक खर्च आता है। इसके बावजूद चिकित्सा व्यवस्था की सटीक जानकारी भी नहीं मिलती है। पीजीआई के निदेशक प्रो. राकेश कपूर ने बताया कि मरीजों की बढ़ती वेटिंग को खत्म करने के लिए सीसीएम में आठ बेड बढ़ाने का प्रस्ताव है, जिसके लिए संसाधन एकत्र करने के लिए प्रस्ताव बनाया गया है। 

इसके अलावा इमरजेंसी में भी बेढ़ बढ़ाने का प्रस्ताव है। सीसीएम में बढ़ती वेटिंग के संबंध में संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. सुशील गुप्ता बताते हैं कि मरीजों को लाने से पहले आईसीयू में बेड खाली है या नहीं। इसकी जानकारी करके मरीज को लाएं तो बेहतर रहेगा, वरना बेड के अभाव में गंभीर मरीज की हालत आैर गंभीर हो सकती है।  

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