लखनऊ । राजधानी में डेंगू का संक्रमण तेजी से पैर पसार रहा है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार को डेंगू के 22 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। इसके साथ ही इस साल जनवरी से अब तक कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 577 हो गई है। खास बात यह है कि अकेले अक्टूबर के महीने में ही लगभग 300 लोग इस बीमारी की चपेट में आ चुके हैं, जिससे स्वास्थ्य विभाग और आम जनता की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं।
विभिन्न क्षेत्रों में डेंगू का हाल और प्रशासनिक कार्रवाई
नवीनतम मामलों के अनुसार, राजधानी के विभिन्न इलाकों में संक्रमण फैल रहा है:
इंदिरानगर: इस पॉश इलाके में सबसे अधिक 6 नए मरीज मिले हैं, जो प्रशासन के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।
अलीगंज और चंदरनगर: दोनों क्षेत्रों से 5-5 नए मरीज सामने आए हैं।
चिनहट: यहां 2 मरीज मिले हैं।
अन्य क्षेत्र: ऐशबाग, सरोजनीनगर, एनके रोड और रेडक्रॉस क्षेत्र से 1-1 मरीज की पुष्टि हुई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जगह-जगह जलभराव के कारण मच्छरों का लार्वा तेजी से पनप रहा है, जिससे पॉश इलाकों में भी संक्रमण का खतरा लगातार बना हुआ है।
फैजुल्लागंज में स्वास्थ्य विभाग सक्रिय, बांटे गए ओआरएस और क्लोरीन की गोलियां
संक्रमण को रोकने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने प्रभावित इलाकों में मोर्चा संभाल लिया है। फैजुल्लागंज क्षेत्र में जलभराव की समस्या के बाद सीएमओ के निर्देश पर राहत कार्य तेज कर दिए गए हैं:
नगरीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र फैजुल्लागंज की प्रभारी डॉ. आसमा के नेतृत्व में आशा और एएनएम की टीमों ने मिल्लतनगर कच्ची ढाल और कृष्ण लोक नगर में कुल 110 घरों का स्वास्थ्य सर्वेक्षण किया।
इस दौरान लोगों को क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस के पैकेट वितरित किए गए।
मोबाइल मेडिकल यूनिट के जरिए मिल्लतनगर में 32 और परागी मंदिर क्षेत्र में 31 लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें चिकित्सीय सहायता दी गई।
इसके अलावा, आपात स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र में 108 एंबुलेंस की 24 घंटे तैनाती सुनिश्चित की गई है।
निजी पैथोलॉजी में मनमानी वसूली, जांच दरें अब तक तय नहीं
एक तरफ जहां डेंगू के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रशासनिक उदासीनता के कारण आम जनता आर्थिक शोषण का शिकार हो रही है। राजधानी में डेंगू जांच के लिए अब तक कोई आधिकारिक दरें तय नहीं की गई हैं, जिसका फायदा उठाकर निजी पैथोलॉजी संचालक मनमाने दाम वसूल रहे हैं:
मरीजों को डेंगू की जांच के लिए 1500 रुपये से 1700 रुपये तक चुकाने पड़ रहे हैं।
जानकीपुरम, महानगर, कृष्णानगर और चौक जैसे इलाकों की पैथोलॉजी में यह मनमानी जोरों पर है।
वहीं दूसरी ओर, सरकारी अस्पतालों में रैपिड कार्ड टेस्ट में डेंगू के संकेत मिलने के बाद एलाइजा (ELISA) जांच से पुष्टि की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इस प्रक्रिया में लंबा समय लगने के कारण मरीजों और उनके तीमारदारों को काफी परेशानियों और इंतजार का सामना करना पड़ रहा है।












