लखनऊ। गोमती नगर के डा. राम लोहिया अस्पताल में महिला के शव को कुत्तों के द्वारा नोंचे जाने की घटना के बाद अगर घटनाओं को देखा जाए तो राजधानी की शवगृह शवों के लिए सुरक्षित नही है। यहां पर शवों के सड़ने से लेकर छेड़छाड़ तक की घटनाओं को दफन कर दिया जाता है।
वर्षो पहले बलरामपुर अस्पताल का शवगृह में लाशों से नेवले आंखे निकाल का खा गये थे। कई बार हो चुकी इन घटनाओं को दबाने की कोशिश की गयी, लेकिन घटना बाहर आने पर बवाल मच गया था। इसके बाद काफी हंगामा मचने पर शव गृह को सुरक्षित करने के लिए दरवाजा लगा दिया गया था, लेकिन अभी तक अन्य व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसी प्रकार सिविल अस्पताल में भी कुछ वर्ष पहले एक शव के साथ छेड़छाड़ की घटना होने के बाद ही सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौंबद किया गया था।
सबसे अधिक पोस्टमार्टम करने वाली केजीएमयू का शवगृह भी सुरक्षित नहीं कहा जा सकता है। यहां पर शवों के साथ छेड़छाड़ की घटना के बाद ही व्यवस्था को चाक चौबंद किया गया। फिर भी कुछ महीने पहले लगातार कई हफ्तों तक डीप फ्रीजर खराब रहा। इसमें लावारिस व दूसरे दिन पोस्टमार्टम किये जाने वाले शव को रखा जाता है, पर खराब रहने से लावारिस लाश सड़ गयी आैर लावारिस लाशों के इस मामले को यही दफन कर दिया गया। काफी हंगामा होने के बाद ही डीप फ्रीजर को केजीएमयू प्रशासन ने ठीक कराया।












