लखनऊ। दिल्ली एनसीआर की तर्ज पर प्रदेश में भी पटाखों से होने वाले प्रदूषण को देखते हुए रोक लगाने की मांग इंडियन चेस्ट सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. सूर्यकांत ने की है। डा. सूर्यक ांत ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि प्रदेश में पचास लाख लोग अस्थमा से पीड़ित है आैर 60 लाख लोग सीओपीडी की बीमारी के चपेट में है। पटाखों के कारण इसकी दिक्कतें तो बढ़ती ही है आैर अन्य लोग भी सांस लेने में दिक्कत महसूस करते है। ऐसे में उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिये है।
डा. सूर्यकांत ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में कहा है कि पटाखा जलाने के बाद उसका धुंआ ऐसी महीन धूल से सराबोर हो जाता है, जो बड़ी आसानी से हमारे फेफड़ों में प्रवेश कर सकती है। यह सांस के रोगियों के श्वसन मार्ग की सूजन को बढ़ा देता है। इसके कारण उन्हें सांस लेने में दिक्कत पैदा होती है। इसके कारण उन्हें दमा का दौरा भी पढ़ सकता है। डा. सूर्यक ांत ने बताया कि भारतीय विष अनुसंधान केन्द्र लखनऊ के अनुसार गत वर्ष दीपावली पर महीन धूल में 2015 की तुलना में 152 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गयी।
आतिशबाजी का धुअंा सभी को किसी न किसी तरह से प्रभावित करता है। गत वर्ष दीपावली पर पटाखों के धुंए से 31. 2 प्रतिशत लोगों को खांसी व सांस फूलने की शिकायत हुई थी। इसके अलावा 50 प्रतिशत लोग जलने के कारण खतरा बना रहता है। डा. सूर्यकांत ने कहा है कि लोगों की हित में ध्यान रखते हुए प्रदेश में आतिशबाजी पर प्रतिबंध लगाने की कृपा करें। यदि यह किसी कारण इस बार सम्भव न हो तो पटाखे आैर आतिशबाजी जिनके कारण वायु प्रदूषण आैर ध्वनि प्रदूषण ज्यादा होता है, उस पर रोक लगाये। सबसे महत्वपूर्ण यह है कि आतिशबाजी की समय सीमा निश्चित कर दी जाए। इसकी अनुपालन सख्ती से कराया जाए।