लखनऊ। ब्लड जांच में नेट (न्यूक्लिक एसिड टेस्ट ) जांच किट की बढ़ती उधारी को कम करने के लिए किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने ब्लड यूनिट शुल्क का दाम बढ़ाने का निर्णय लिया है। अब जनरल वार्ड में एक ब्लड यूनिट का शुल्क पचास प्रतिशत तक बढ़ाया जा रहा है। इसके अलावा अन्य वार्डो का शुल्क अभी बढ़ाने का विचार नही है।
केजीएमयू के ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग के तहत चलने वाले ब्लड बैंक में नेट की जांच की जाती है। यह जांच ब्लड की सबसे उच्चस्तरीय जांच कहलाती है। इसकी जांच करने के लिए विशेष प्रकार की किट आती है, जिससे जांच करने पर ब्लड में एचआईवी वन व टू के अलावा हेपटाइटिस बी, सी व अन्य बीमारियों भी पकड़ में आ जाती है जो कि सामान्य ब्लड की जांच स्क्रीनिंग में नही आती है। इसके लिए बजट केजीएमयू प्रशासन देता है,परन्तु बजट की कमी के चलते नेट की जांच किट का भुगतान नही हो पा रहा है। ऐसे में ब्लड ट्रांफ्यूजन विभाग कम्पनी से ली जाने वाली किट का भुगतान नहीं कर पा रही है। उधार लगातार बढ़ने कारण नेशनल हेल्थ मिशन से मदद की गुहार की गयी।
मिशन ने बजट देने के लिए केन्द्र सरकार से गुहार लगायी। बजट देने के लिए संस्तुति तो मिल गयी लेकिन उसे पूरा करने में कुछ महीने का समय लग जाएगा। लगातार नेट जांच किट का बढ़ते उधार को कम करने के लिए ब्लड यूनिट का शुल्क बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। जनरल वार्ड मंे भर्ती किये जाने वाले मरीज को अब तक सामान्य ब्लड यूनिट शुल्क के बराबर नेट जांच किया हुआ ब्लड यूनिट दिया जाता है। यहां पर मात्र चार सौ रुपये का एक ब्लड यूनिट मिल जाता है। अब इसका शुल्क बढ़ा कर छह सौ रुपये किया जा रहा है। ब्लड बैंक प्रभारी डा. तूलिका चंद्रा का कहना है कि नेट की जांच किया हुआ ब्लड यूनिट का शुल्क फिर भी कम है। उन्होंने बताया कि प्राईवेट वार्ड का शुल्क एक हजार रुपये तथा निजी अस्पतालों से आने वाले लोगों को दो हजार रुपये शुल्क लिया जाता है।
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