लखनऊ। गोमती नगर स्थित राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में निदेशक प्रो. एके त्रिपाठी के पद से हटने के बाद अब जांच में दायरे में आने की संभावना हो सकती हैं। प्रो. त्रिपाठी पर वह भ्रष्ट्राचार का आरोप लगा है । यह भी आरोप लगा है कि अपनी गड़बड़ियों को छिपाते हुए लोहिया संस्थान में नियुक्त पायी है।
बताते चले कि संतकबीर नगर के सांसद प्रवीण कुमार ने मुख्यमंत्री को भेजे अपने शिकायती पत्र में खुले शब्दों में कहा कि प्रो. त्रिपाठी केजीएमयू में वर्ष 2004 में केजीएमयू में हुई समूह ग की भर्तियों में भ्रष्ट्राचार का आरोप लगा हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन मण्डलायुक्त प्रशांत त्रिवेदी मामले की जांच में पाया गया कि प्रो. त्रिपाठी ने भर्तियों में भारी गड़बड़ी की है। यह जांच रिपोर्ट केजीएमयू कार्यपरिषद को भेजी गयी थी और उनके खिलाफ कार्रवाई के आदेश भी दिए गए था, लेकिन कार्रवाई नहीं हो पायी।
वह चिविवि हिमैटोलॉजी विभाग के प्रमुख भी बना दिया गया। प्रो. त्रिपाठी ने सभी खामियों को छुपाते हुए लोहिया संस्थान के निदेशक का पद हासिल कर दिया। बताया जा रहा है कि पद से हटाने के बाद उनकी निदेशक पद पर नियुक्ति को लेकर कभी भी जांच के साथ कार्रवाई के आदेश जारी किए जा सकते हैं।












