लखनऊ। बलरामपुर अस्पताल के आपरेशन थियेटर में सर्जरी करने से ठीक पहले साठ वर्षीय मरीज को हार्ट अटैक आ गया आैर पल भर में ही दिल की धड़कन थम गई। बीपी-पल्स मानीटर भी सन्नाटा दिखाने लगे। सर्जरी के लिए तैयार डाक्टरों को होश फाख्ता हो गये। आनन-फानन में आपरेशन थियेटयर में कार्डियक, एनेस्थिसिया के डॉक्टरों को बुला लिया गया। डॉक्टरों ने बोला धकड़न थम चुकी थी। फिर भी पांच डॉक्टरों की टीम ने एक रिस्क लेते हुए बारी- बारी से एक-एक करके लगभग 40 मिनट तक मरीज पर सीपीआर किया। लगभग चालीसवें मिनट में मरीज की श्वसन तंत्र में हरकत हुई तो राहत की सांस ली। उनका मानना है कि मरीज की जान बचाने में सीपीआर करना ही जीवनरक्षक साबित हो गया।
बाराबंकी निवासी मरीज शिव राजा (60) ने ओपीडी में सर्जरी विभाग के डाक्टर को दिखाया था। डॉक्टर ने जांच के बाद गाल ब्लेडर का सर्जरी बताते हुए मरीज को भर्ती कर लिया। डॉक्टर मरीज को सुबह करीब 9 बजे सर्जरी करने के लिए ओटी में ले ही गये थे कि सर्जरी के लिए टेबल पर मरीज को लिटाते ही उसे हार्ट अटैक पड़ गया। जब तक कुछ समझते मरीज को एनेस्थिसिया देने के लिए मरीज की बीपी व पल्स मानीटर में सन्नाटा हो गया। इस घटनाक्रम में ओटी में अफरातफरी मच गई।
डॉक्टरों ने आनन-फानन में मरीज को जीवन रक्षक इंजेक्शन लगाए , फिर भी हार्टबीट वापस नहीं लौटी। इसके बाद विशेषज्ञों की टीम ने मरीज को कार्डियो पल्मोनरी रिससिटैशन (सीपीआर) देना शुरू किया। करीब 40 मिनट तक पांच डॉक्टरों ने मरीज पर सीपीआर किया गया। जिसके बाद मरीज की सांसें वापस लौट आई। इसके बाद मरीज को वेंटीलेटर सपोर्ट पर रखा गया। जहां पर मरीज की हालत में सुधार होने लगी। इसके बाद डाक्टरों ने मरीज की सर्जरी रोक दिया गया। निदेशक डॉ. राजीव लोचन का कहना है कि सीपीआर करके डॉक्टरों ने मरीज की जान बचा ली वरना दिल की धड़कन बंद होने बाद
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