लखनऊ। सीने में जलन, आंखों में तूफां या क्यों है, इस शहर में हर शख्स परेशान सा क्यों है…. यह गजल मौसम पर बिल्कुल खरी उतर रही है। राजधानी में वायु प्रदूषण लगातार बढ़ रहा है। इसका असर लोगों के हेल्थ पर सीधे पड़ रहा है। अगर देखा जाए तो किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लोहिया संस्थान, सिविल व बलरामपुर अस्पताल की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक सांस लेने में दिक्कत के अलावा नेत्र रोग विभाग में भी मरीज पहुंच रहे है। कुछ अस्पतालों ने इससे निपटने के लिए तैयारी भी शुरू कर दी है।
केजीएमयू में रेस्परेटरी मेडिसिन विभाग की ओपीडी से लेकर ट्रामा सेंटर की इमरजेंसी में सांस लेने में दिक्कत के मरीज आ रहे है। विभाग प्रमुख डा. सूर्यकांत बताते है कि दीपावली से वायु प्रदूषण शहर में तेजी से बढ़ रहा है। धुंध छायी रहने से लोगों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी है। सांस के 15 से बीस प्रतिशत मरीज बढ़ गये है। खास कर बच्चों व बुजुर्गो को दिक्कत हो रही है। इनमें पहले से अस्थमा, सीओपीडी या अन्य कारणों से सांस लेने वाले मरीज ज्यादा प्रभावित हो रहे है। उन्होंने बताया कि सांस लेने में दिक्कत के दो तरह से मरीज आ रहे है। इनमें सर्दी जुकाम के कारण सीना जकड़ा होना या फ ेफड़े की बीमारी के कारण होने वाली परेशानी से सांस लेने में दिक्कत हो रही है। डा. सूर्यकांत ने बताया कि इसके लिए डाक्टरों को विशेष रूप सेे मरीजों के इलाज के अतिरिक्त व्यवस्था भी करने के लिए कहा गया है।
इसके अलावा लोहिया संस्थान में सांस के मरीज काफी संख्या में आ रहे है। यहां के नेत्र रोग विभाग में आंखों में जलन, खुजली व जलन की दिक्कत लेकर मरीज पहुंच रहे है। यही नही श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल में सांस की दिक्कतों की समस्या से जुड़े कु ल 180 मरीज पहुंचे। चिकित्सा अधीक्षक डा. आशुतोष दुबे ने बताया कि ज्यादातर मरीज पहले से चेस्ट की बीमारी से पीड़ित है। जिनकों बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण दिक्कत हो रही है। मरीजों की दिक्कत के अनुसार इन्हेंलर का प्रयोग भी बताया जा रहा है। बलरामपुर अस्पताल की इमरजेंसी से लेकर ओपीडी तक लगभग 230 मरीज सांस के मरीज पहुंच गये। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि गंभीर मरीजों को भर्ती कर लिया गया आैर अन्य का प्राथमिक उपचार करके डिस्चार्ज कर दिया गया।
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