लखनऊ – उत्तर प्रदेश के मुख्यमंाी योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम आदर्श जीवन एवं सांस्कृतिक मूल्यों के अधिष्ठाता थे और कला के द्वारा रामायण के प्रसंगों को आमजन तक पहुंचाने वाले कलाकारों एवं सांस्कृतिक कर्मियों का योगदान अभिनन्दनीय है। योगी बुधवार को यहां अपने सरकारी आवास पर ‘भारतीय भाषाओं में रामकथा” के विद्वानों, अन्तर्राष्ट्रीय रामायण चिाकला शिविर के कलाकारों एवं थाईलैण्ड की ‘खोन’ रामलीला के प्रशिक्षकों को सम्मानित किया। यह आयोजन दीपोत्सव-2019 के अवसर पर अयोध्या शोध संस्थान द्वारा किया गया।
इस मौके पर मुख्यमंाी ने साहित्यकारों एवं कलाकारों का स्वागत करते हुए कहा कि इन्होंने भारत के अतिप्राचीन सांस्कृतिक स्तम्भ को एक नई पहचान देने का कार्य किया है। मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम आदर्श जीवन एवं सांस्कृतिक मूल्यों के अधिष्ठाता हैं। मान्यता है कि जिसने भगवान श्रीराम का नाम जपा उसका जन्म और जीवन धन्य हो गया। साहित्यकारों ने अपनी लेखनी के माध्यम से मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की गाथा को लाखों लोगों तक पहुंचाकर एक बड़ा शुभ कार्य किया है।
योगी ने कहा कि अपनी कला के द्वारा रामायण के प्रसंगों को आमजन तक पहुंचाने वाले कलाकारों एवं सांस्कृतिक कर्मियों का योगदान अभिनन्दनीय है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि अयोध्या शोध संस्थान देश और दुनिया में बिखरी रामायण काल से जुड़ी सभी वस्तुओं का संकलन करने में सफल होगा।
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