प्रीमेच्योर शिशुओं के लिए बारह हजार डायपर्स केजीएमयू को मिले

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लखनऊ। विश्व प्रीमेच्योर बेबी डे पर किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में बारह हजार डायपर्स बाल रोग विभाग के एनआईसीयू में सौपे गये। यह जानकारी मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डा. एस एन शंखवार ने पत्रकार वार्ता में दी। उन्होंने बताया कि एक कम्पनी ने सबसे छोटे डायपर्स प्रीमेच्योर बेबी के लिए दिये है। जिससे प्रीमेच्योर बेबी की बेहतर देखभाल की जा सके गी।

उनके साथ पत्रकार वार्ता में बाल रोग विभाग व एनआईसीयू की प्रमुख माला कुमार ने बताया कि प्रीमेच्योर बेबी को शुरूआती दिनों में इलाज के साथ ही देखभाल भी विशेष प्रकार से करनी होती है। वह शारीरिक रूप से बहुत कमजोर होते हैं, पहनने के लिए कपडे़ अत्यंत मुलायम चाहिये, जोकि सामान्यतया बाजार में नहीं मिलते हैं। जिसकी वजह से रूई आदि का प्रयोग करना पड़ता है। उनकी दिक्कत को देखते हुए कंपनी ने प्रीमेच्योर बेबी के लिए विशेष प्रकार के डायपर तैयार किये हैं। इस कंपनी ने 12000 विशेष डायपर्स केजीएमयू को निशुल्क दिये हैं। जो कि क्वीनमैरी व एनआईसीयू में भर्ती प्रीमेच्योर बेबी को नि:शुल्क उपलब्ध कराया जायेगा। कंपनी द्वारा तैयार किये गये डायपर्स से नवजात को आराम मिलने के साथ ही उन्हें उठाने व लिटाने में राहत मिलती है।

यह डायपर्स पहनाने के बाद नवजात अपने पैरों को आसानी से मूव (चलाता) करता है, जबकि सामान्य पै पर्स से बच्चे पैर नही चला पाते हैं। उन्होंने बताया कि क्वीन मैरी में हर माह 700-800 बच्चे जन्म लेते हैं, जिनमें से 25 फीसदी प्रीमेच्योर बेबी होते हैं। उनकी त्वचा मुलायम होती है, पसलियां पतली होती हैं, बार बार उन्हें उठाया भी नही जा सकता है। इस अवसर पर केजीएमयू के पल्मोनरी मेडिसिन के डॉ.संतोष कुमार और डॉ.शालिनी त्रिपाठी मौजूद रहीं।

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