लखनऊ । बिगड़ती लाइफस्टाइल , कुपोषण और जागरूकता की कमी के चलते गर्भावस्था से जुड़ी दिक्कतों में तेजी से बढ़ती जा रही है। बदलती डाइट, टेंशन और नियमित टेस्ट के नजर अन्दाज के कारण प्रसव के दौरान जटिल स्थितियां सामने आ रही हैं। जो जच्चा-बच्चा के लिए संकट बन सकती हैं। यह बात लखनऊ ऑब्स्टेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजिकल सोसाइटी की अध्यक्ष डॉ. प्रीति कुमार ने बृहस्पतिवार को पत्रकार वार्ता में आर्ट ऑफ बर्थिंग कानक्लेव 2026 में जानकारी दी।
डॉ. प्रीति कुमार ने कहा कि 10, 11 और 12 अप्रैल को तीन दिवसीय कान्फ्रेंस होगी। इसमें भारत के अलावा अन्य देशों से डॉक्टर शामिल होंगी। काफी मामलों में गर्भवती महिलाओं को समय पर सही सलाह और पोषण नहीं मिल पाता। जिससे एनीमिया, ब्लड प्रेशर और अन्य जटिलताएं बढ़ जाती हैं। इसका असर प्रसव के दौरान साफ दिखाई देता है। जहां जरा सी लापरवाही भी बड़ी समस्या का रूप ले सकती है।
केजीएमयू के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग (क्वीनमेरी) की वरिष्ठ डॉ. सुजाता देव ने कहा कि गर्भावस्था व प्रसव के दौरान दिक्कतों को काफी हद तक रोका जा सकता है, लेकिन डॉक्टर की सलाह पर गर्भावस्था के दौरान नियमित जांच करायी जाए। विशेषज्ञों की निगरानी में इलाज हो। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की उपलब्धता और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना भी बेहद जरूरी है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों और हाई टेक चिकित्सा प्रशिक्षण के जरिए सुरक्षित और सम्मानजनक प्रसव सुनिश्चित किया जा सकता है। इसके लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में जागरूकता अभियान चलाना और महिलाओं को समय-समय पर आवश्यक जानकारी देना महत्वपूर्ण है। आयोजन सचिव व क्वीनमेरी की डॉ. सीमा मेहरोत्रा ने कहा कि गर्भावस्था के दौरान असमान्य लक्षणों को नजरअंदाज न करें। डॉक्टर की परामर्श पर दवाएं लें। संतुलित डाइट लेना चाहिए।












