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लखनऊ। पीजीआई में रेडियोलॉजी समेत कई विभागों में पीपीपी मॉडल पर मशीनों को लगाने का प्रस्ताव बना है। यह प्रस्ताव आगामी शासी निकाय की बैठक में रखा जाएगा। इससे पहले पीजीआई में पीपीपी मॉडल पर स्टेट लैब को दिया जा चुका है। ऐसे में अब पीपीपी मॉडल को पीजीआई में स्वीकार नहीं किया जाएगा। इसके लिए पीजीआई के कर्मचारी विरोध करेंगे।
संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ के महामंत्री धर्मेश कुमार का कहना है कि संस्थान में वर्तमान में 13 सौ के करीब नियमित कर्मचारियों के पद खाली हैं। संस्थान उन पदों पर भर्ती नहीं कर रहा है। आरोप है कि दूसरी ओर संस्थान प्रशासन लगातार आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रहा है। इससे यह साफ होता है कि पीजीआई को पूरी तरह से निजीकरण की ओर ले जाया जा रहा है। यह सुपर स्पेशियलिटी संस्थान के हित में नहीं होगा। इसलिए संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ संस्थान में पीपीपी मॉडल पर मशीनों को लगाने और संस्थान में निरंतर आउटसोर्सिंग पर की जा रही भर्ती, दोनों का पूरी तरह से विरोध करता है।



