लखनऊ। देश में बर्न के लगभग 7 लाख लोगों को भर्ती करके उच्चस्तरीय इलाज की आवश्यकता होती है,समय पर सही इलाज न मिलने के कारण 2.5 लाख लोग अपंग हो जाते हैं और 1.4 लाख लोगों की मौत हो जाती है। यह जानकारी नेशनल एकेडमी ऑफ बर्न इण्डिया के तत्वाधान में कुंभनगर में आयोजित बर्न वाक के अवसर पर डॉ. मथांगी रामाकृष्गन ने दी। इस बर्न वॉक को सुबह 6 बजे केजीएमयू के कुलपति प्रो. एमएलबी भट्ट ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया, जिसमें 100 प्लास्टिक सर्जन शामिल थे।
उन्होंने बताया कि इन जलने वाले लोगों में 90 प्रतिशत जलने वाले लोगों की जान बचायी जा सकती है। इस अवसर पर केजीएमयू के प्लास्टिक सर्जरी विभाग के प्रमुख प्रो. एके सिंह ने बताया कि भारत में जलने के रोगियों की देखभाल और इलाज के साथ-साथ इसकी रोकथाम के लिए अब तक भारत में विदेशी प्रोटोकाल ही अपनाया जाता रहा है। अब यह प्रयास है कि भारत के परिपेक्ष्य में ही इसका प्रोटोकाल निर्धारित किया जाएगा और उसको स पूर्ण भारत में अमल में भी लाने का प्रयास रहेगा, यह एक आम और गंभीर विषय है। इस अवसर पर डॉ. एसपी बजाज ने आरम्भ से लेकर अब त क बर्न यूनिट पर अपने व्याख्यान के साथ-साथ प्रतिनिधियों को अपने अनुभवों को भी बताया, जिसमें सबसे ज्यादा इस बात पर ये ध्यान देना चाहिए कि इसकी स्थापना विदेशी प्रोटोकॉल को त्यागकर भारतीय प्रोटोकाल अपनाकर बर्न यूनिट की स्थापना की जाए।
इस अवसर पर इंदौर से आई डॉ. शोभा चमनियों ने बताया कि लोगों में जलने के प्रति लोगों में इसकी जागरुकता ही इसका बचाव है, गंभीर रूप से जले अधिकांश मामलों में जलने पर रोगी की मृत्यु हो जाती है। कुम्भ में जिस प्रकार समुद्र मंथन हुआ था उसी प्रकार से चिकित्सकों का दल उसी प्रकार से दाह संबंधी विषयों पर मंथन किया जा रहा है, जिसका लाभ होगा।
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