KGMU: मरीज की मौत के बाद भी इनाम! लोहिया संस्थान में मिली नई तैनाती, निजी अस्पताल पर मेहरबान प्रशासन

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​KGMU के रेजिडेंट डॉक्टर ने कमीशन के चक्कर में मरीज को निजी अस्पताल भेजा था।
​गलत ब्लड चढ़ने से महिला की हुई थी मौत, जांच रिपोर्ट शासन को भेजी गई।
​दोषी डॉक्टर को सजा के बजाय बांड के तहत लोहिया संस्थान में मिल गई पोस्टिंग।

​लखनऊ। किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय से एक ऐसा हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जो सरकारी चिकित्सा व्यवस्था और डॉक्टरों की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। कमीशन के लालच में एक महिला मरीज की जान जोखिम में डालकर उसे निजी अस्पताल शिफ्ट कराने वाले आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर पर कार्रवाई करने के बजाय, उसे ‘लोहिया संस्थान’ जैसी प्रतिष्ठित जगह पर नई तैनाती दे दी गई है। वहीं, दूसरी तरफ स्वास्थ्य विभाग लापरवाही बरतने वाले निजी अस्पताल और गलत खून देने वाले ब्लड बैंक पर पूरी तरह मेहरबान नजर आ रहा है।

​क्या है पूरा मामला?
​अंबेडकर नगर की रहने वाली कमलेश देवी के कूल्हे में फ्रैक्चर हो गया था, जिसके बाद उन्हें बीती 6 जून को KGMU में भर्ती कराया गया। आरोप है कि वहां तैनात एक रेजिडेंट डॉक्टर ने सही इलाज न मिलने का डर दिखाया और बेहतर इलाज का झांसा देकर मरीज को आलमबाग के कृष्णा नगर स्थित एक निजी हॉस्पिटल में शिफ्ट करवा दिया।
​45 हजार में हुआ था सौदा: इस ‘डीलिंग’ के लिए मरीज के परिजनों से करीब 45 हजार रुपये ऐंठे गए, जिसमें से 11 हजार रुपये का ऑनलाइन भुगतान भी किया गया था।
​लापरवाही की हद: ‘B+’ मरीज को चढ़ा दिया ‘A+’ खून
​निजी अस्पताल में डॉक्टरों ने मरीज को दो यूनिट खून चढ़ाने की सलाह दी। मृतका के पति विनय दुबे के मुताबिक, उनकी पत्नी का ब्लड ग्रुप B पॉजिटिव (B+) था। लेकिन निजी ब्लड बैंक की घोर लापरवाही के कारण उन्हें A पॉजिटिव (A+) ग्रुप का खून जारी कर दिया गया।

​गलत खून चढ़ते ही कमलेश देवी की हालत बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें 16 जून को वापस KGMU के ट्रॉमा सेंटर के क्रिटिकल केयर यूनिट (CCU) में भर्ती कराया गया, जहाँ जिंदगी और मौत से जूझते हुए 20 जून की शाम को उन्होंने दम तोड़ दिया।

​इस पूरे मामले पर भारी हंगामा होने के बाद KGMU प्रशासन ने आरोपी रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ जांच बैठा दी।

KGMU के प्रवक्ता डॉ. केके सिंह ने बताया:
​”रेजिडेंट डॉक्टर के खिलाफ जांच पूरी हो चुकी है और इसकी रिपोर्ट शासन को सौंप दी गई है।”
​लेकिन हैरान करने वाली बात यह है कि जब तक जांच पूरी हुई, तब तक डॉक्टर साहब की पढ़ाई पूरी हो चुकी थी। चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय (DGME) की काउंसलिंग के माध्यम से बांड के तहत सोमवार को उसी आरोपी डॉक्टर को ‘लोहिया संस्थान’ आवंटित कर दिया गया।
​सवालों के घेरे में स्वास्थ्य विभाग: दोषियों पर मेहरबानी क्यों?
​इस पूरे प्रकरण में लखनऊ स्वास्थ्य विभाग की भूमिका भी संदिग्ध नजर आ रही है।

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