लखनऊ। उत्तर प्रदेशीय सफ़ाई कर्मचारी संघ द्वारा केजीएमयू के समूह घ के संविदाकर्मियों में रोहिंग्या और बांग्लादेशियों को नौकरी दिए जाने के विरोध में आयोजित किए जाने वाला आज का प्रदर्शन केजीएमयू प्रशासन द्वारा निवेदन किए जाने के बाद तीन दिन के लिए रोक दिया गया है।
केजीएमयू प्रशासन ने वाल्मीकि समाज के महत्वपूर्ण प्रतिनिधियों को आमंत्रित करके उनकी नाराज़गी को सुना है, और इस संबंध में कहा है कि वह वाल्मीकी समाज के प्रमुख लोगों के साथ पुनः दिनांक 23 जनवरी को बैठक करेंगे और भविष्य में इन नौकरियों में वाल्मीकि समाज को उचित प्रतिनिधित्व मिल सके, इसके बाद विस्तार से चर्चा करेंगे।
वाल्मीकि समाज की तरफ़ से वार्ता करने गए श्री राहुल वाल्मीकि और अमन वाल्मीकि ने स्पष्ट किया है कि वह अपने समाज के साथ किसी भी तरह से अन्याय को स्वीकार नहीं करेंगे। केजीएमयू प्रशासन से हमारे संगठन की स्पष्ट मांग है कि इन नौकरियों में स्थानीय वाल्मीकि समाज के लोग किस प्रकार से प्राथमिकता प्राप्त कर सकते हैं, उसके बारे में स्थायी व्यवस्था बने और इस संबंध में केजीएमयू प्रशासन कोई ऐसी सतत व्यवस्था बनाये जहाँ वाल्मीकी समाज के लोग केजीएमयू में नौकरी प्राप्त कर सकें।
हम किसी भी व्यक्ति अथवा संस्था से लड़ाई नहीं करना चाहते, लेकिन जिस तरफ़ की स्थिति से हमारा समाज दो चार हो रहा है, ऐसे में हमारे समाज के साथ किसी भी अन्याय को सहने का अर्थ है समाज को अपने से गरीब और लाचार बने रहने देना।
वाल्मीकि समाज के प्रमुख प्रतिनिधि 23 जनवरी को केजीएमयू प्रशासन से वार्ता करेंगे। तब तक के लिए उत्तर प्रदेशीय सफ़ाई कर्मचारी संघ अपने आंदोलन को रोक रहा है। लेकिन यदि हमें लगता है कि केजीएमयू प्रशासन संवेदनशील नहीं है तो अगले सप्ताह से हम व्यापक आंदोलन की तैयारी करेंगे।




