देश के अलग राज्यों में दो दिन होगा होलिका दहन
सूर्यास्त शाम 16:09 के बाद हुआ तो होलिका दहन 6 मार्च को सूर्यास्त 6:09 से पहले हुआ तो दहन 7 मार्च को
लखनऊ। होलिका दहन कब होगा. इसको लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। सोशल मीडिया पर ज्योतिषाचार्यों के अनेक मत साझा किये जा रहे हैं, जो दुविधा बढ़ाने वाले साबित हो रहे हैं। होली पर शहर से लेकर गांवों तक बहस छिड़ी हुई है। इंटौंजा क्षेत्र के कुम्हरावां गांव निवासी एवं समाजसेवी अजीत कुमार कहते हैं कि इस बार कुछ समझ में नहीं आ रहा है जबकि हमारे गांव में अनोखी होली होती है। यहां होरिहारों की टोली घर-घर रंग खेलने जाती है, इससे एक दिन पहले एक नोटिस प्रकाशित होती है, जिसमें बड़े-छोटे सभी का मजाक बनाया जाता है। लगता है कि इस बार होली पर कुछ ऐसा ही ज्योतिषाचार्य भी कर रहे हैं। कुल मिलाकर होली पर मतभेद पंचांगों के कारण बना है, इससे होलिका दहन के एक नहीं बल्कि तीन मुहूर्त निकाले गये हैं। फिलहाल, सभी लोग चाहते हैं कि होलिका दहन और रंग एक ही समय पर खेला जाए। सीतापुर रोड हाथी वाले बाबा हनुमान मंदिर और फिर ताड़ीखाना स्थित विंध्याचल मंदिर में विद्वानों ने एक- एक संस्कृत का श्लोक सुनाकर अलग-अलग दिन होलिका दहन करने का निर्णय लिया है।
इस वर्ष पूर्णिमा तिथि 6 मार्च सायं 4:17 से प्रारंभ होकर 7 मार्च की शाम को 6:09 तक रहेगी। इसलिए भारत में जहां सूर्यास्त 6:09 के बाद होगा, वहां पर होलिका दहन 6 मार्च को और जिन प्रदेशों में सूर्यास्त 6:09 से पूर्व होगा वहां पर दहन 7 मार्च को किया जाएगा। ठाकुर प्रसाद रूपेश पंचांग,अन्य पांचांग आदि में काफी अंतर देखने को मिल रहा है। इसके चलते छह मार्च को होलिका दहन वाले स्थान राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, गुजरात, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तर पश्चिमी मध्य प्रदेश, आंध प्रदेश, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल गोमतीनगर, आदि और 7 मार्च को होलिका दहन वाले गु स्थान पूर्वी उत्तरप्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, उत्त पूर्वी छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार, उड़ीसा, केन्द्र असम सहित सभी पूर्वी प्रदेश में जहां 6 मार्च होली को होलिका दहन होगा, वहां 6 मार्च सोमवार सिले की रात यानि 7 मार्च को 1:52 के बाद होलिका दहन होगा।
लखनऊ विवि के ज्योतिर्विज्ञान विभाग के आचार्य डा. विपिन पांडेय ने बताया कि कने निर्णय सिंधु के अनुसार दो पूर्णिमा होने पर इसका अंतिम पूर्णिमा को होलिका दहन करना उत्तम कोई होता है। ऐसे में सात मार्च को शाम को 6:10 सिलेन बजे से शाम लगभग 8:37 तक दो घंटे 27 मिनट की अवधि में होलिका दहन किया जा की बा सकता है। आठ मार्च को रंग खेलना उत्तम हैं उन रहेगा। इसी मुहूर्त पर कई ज्योतिषचार्य भी हो गया अपनी सहमति देते हैं।




