लखनऊ। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने आज वल्र्ड मेडिसन डे पर इंस्टीट्यूट फॉर सोशल हॉरमोनी एण्ड अपलिफ्मेन्ट द्वारा आयोजित आयुष, वैकल्पिक नहीं एकीकृत चिकित्सा पद्धति विषयक संगोष्ठी का उद्घाटन किया। इस अवसर पर राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के निदेशक प्रो एके त्रिपाठी, पूर्व कुलपति अनीस अंसारी, मौलाना खालिद रशीद फरंगी महली, डॉ. मोहम्मद मोहसिन सहित अन्य विशिष्टजन भी उपस्थित थे।
राज्यपाल ने अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा कि आयुर्वेद प्राचीन एवं परम्परागत चिकित्सा पद्धति है, जिसमें चरक, सुश्रुत जैसे महान विद्वानों का नाम लिया जाता है। उसी प्रकार यूनानी पद्धति भी प्राचीन है। हर पौधे में कुछ न कुछ औषधीय गुण होते हैं। दोनों पद्धतियों में उपचार प्रकृति द्वारा प्रदत्त पौधों और जड़ी बूटी के माध्यम से किया जाता है, इसलिये दोनों में बहुत समानताएं हैं। राज्यपाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का असर औषधीय पौधो पर पड़ रहा है। पौधा गुणवत्तायुक्त नहीं होगा तो सफल उपचार संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि पौधो की गुणवत्ता बनाये रखना शोध का विषय है।
श्री नाईक ने कहा कि यदि रोगी को इच्छाशक्ति के साथ सही दवा मिले तो रोगी शीख स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के परिसंवाद या चर्चा के कार्यक्रमों से चिकित्सकों एवं हकीमों को अद्यतन शोध का लाभ मिलेगा तथा रोगी भी जल्द स्वस्थ होंगे। यूनानी पद्धति अरब देशों से भारत में आयी है जिसके साथ विद्धान हकीम इब्ने सिना का नाम जुड़ा है। यदि हकीम इब्ने सिना पर डाक टिकट छापने का प्रस्ताव मिलेगा तो वे अपने स्तर से कोशिश करेंगे। राज्यपाल ने कहा कि वे बरेली यूनानी कालेज की स्थापना के बारे में प्रदेश सरकार एवं आयुष मंत्रालय से बात करेंगे।
उन्होंने कहा कि चिकित्सक गरीब रोगियों को आयुष्मान भारत योजना से जोड़े एवं उनका मार्गदर्शन करें। इस योजना के अंतर्गत रूपये 5 लाख तक का मुफ्त सरकारी इलाज हो सकता है। इस अवसर पर अनीस अंसारी ने स्वागत उद्बोधन दिया तथा हकीम इब्ने सिना के बारे में विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम में प्रो. एके त्रिपाठी एवं डॉ. मोहम्मद मोहसिन, केजीएमयू के डा. कौसर उस्मान सहित अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
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