करोड़ों का दवा घोटाला, जांच में अधोमानक मिली दवाएं

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लखनऊ। पशुपालन में करोड़ों की दवाओं के खरीद में बड़ा घोटाले का खुलासा हुआ है। विभाग द्वारा बीते वर्षों में खरीदी गयी तीन दवाएं लैब टेस्टिंग में फेल हो गयी हैं और अब इन्हें अधोमानक घोषित कर दिया गया है। दवाओं के लैब की रिपोर्ट के बाद विभागीय अधिकारियों ने हड़कंप मचा हुआ है और अपने बचाव के लिए आनन-फानन में दवाएं बनाने वाली कम्पनियों को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा है। एक कम्पनी से दवा के लिए दी गयी धनराशि को वापस करने के निर्देश दिये गये हैं। बताते चले इन दवाओं को मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट गोशालाओं व गोआश्रय स्थलों में रखे गये नौ लाख निराश्रित गोवंशों में धड़ल्ले से सेवन करा दिया किया गया।

 

 

 

 

 

 

्इतना ही नहीं पशुचिकित्सालयों की ओपीडी में भी पशुपालकों के बीच इन दवाओं को वितरण किया गया है।
पशुपालन विभाग द्वारा बीते वर्षों में कई दवाओं की खरीद की गयी है। इनमें से तीन दवाओं को लैब टेस्टिंग के बाद अधोमानक पाया गया है। इनमें से आैषधि ‘आइवरमेटिन एण्ड फेनबेंडाजॉल बोलस (वेट) (फेन-आईवी) बैच नम्बर-19360 अधोमानक पायी गयी है। यह दवा मेसर्स मिनिल लैबोरट्रीज प्राइवेट लिमिटेड जम्मू द्वारा बनायी गयी है। दूसरी आैषधि ‘फेनबेंडाजॉल एण्ड आइवरमेटिन बोलस (फेण्डामेक्ट) बैच नम्बर-ईटी-211209″ शामिल है। यह दवा मेसर्स इथीकेयर लैबोरट्रीज प्राइवेट लिमिटेड, 15-इण्डस्ट्रियल स्टेट डिगाईना, जम्मू द्वारा बनायी गयी है। पशु चिकित्सकों के अनुसार यह दोनों दवाएं पशुओं में कृमिनाशक के रूप में प्रयोग की जाती है। इन दोनों दवाइयों से पशुओं के पेट में मौजूद सभी कीड़ों को मारने के साथ ही पेट की अन्य बीमारी में प्रयोग किया जाता है। तीसरी दवा ‘डोरामेक्टिन” इंजेक्शन भी अधोमानक पायी गयी है। इसका बैच नम्बर-एसएल 1032 है।

 

 

 

 

 

 

इस इंजेक्शन को मेसर्स सैफीकॉन लाइफसाइसेंज, विलेज-लालपुर, किच्छा-रूद्धपुर रोड, रूद्धपुर, उधमसिंह नगर उत्तराखण्ड द्वारा बनाया गया है।
पशु चिकित्सकों के अनुसार इस इंजेक्शन का प्रयोग पशुओं के त्वचा में मौजूद किलनी सहित अन्य पैरासाइट को मारने के साथ ही विभिन्न त्वचा रोगों में किया जाता है। पशुपालन विभाग ने इन दवाओं का पशुओं में जमकर प्रयोग भी किया है। यह सभी दवाएं मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट गोवंश आश्रय स्थलों में रखे गये नौ लाख निराश्रित गोवंशों के साथ ही अन्य गोशालाओं में रखी गयी गायों में खूब प्रयोग की गयी हैं। इसके साथ ही जिलों में लगाये गये पं. दीनदयाल पशु आरोग्य मेलों में आये गोवंशीय पशुओं में भी इनका प्रयोग किया गया है। इतना ही नहीं पशु चिकित्सालयों में होने वाली ओपीडी के माध्यम से भी इनका प्रयोग गोवंशीय व महिषवंशीय पशुओं किया जाता रहा। विभाग द्वारा इन तीनों दवाओं की करोड़ों रुपये खर्च करके खरीद की गयी लेकिन इन दवाओं के अधोमानक पाये जाने के कारण विभागीय अधिकारियों को भले ही इससे फायदा पहुंचा हो ,लेकिन पशुओं के उपचार में यह पूरी तरह विफल रहीं। अधोमानक की रिपोर्ट के बाद निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र डा. जीवन दत्त ने इन दवाओं को बनाने वाली कम्पनियों को नोटिस देकर स्पष्टीकरण मांगा। इसके बाद दो कम्पनियों की ओर से भेजे गये स्पष्टीकरण को विभाग ने तथ्यहीन बताया है। इसके साथ ही एक कम्पनी से धनराशि वापस करने के भी आदेश दिये गये हैं।

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