लखनऊ। अटल बिहारी वाजपेई चिकित्सा विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. अमित देवगन ने कहा कि टीबी किसी को भी हो सकती है। टीबी बच्चों में कुपोषण, कमजोर प्रतिरोधक क्षमता व संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से हो सकती है। टीबी का पुख्ता इलाज है। डॉक्टर की सलाह पर पूरा इलाज कर बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। इलाज के साथ सही पोषण पर ध्यान देने की जरूरत है।
कुलपति डा. देवगन बृहस्पतिवार को चिकित्सा विश्वविद्यालय सभागार में टीबी पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। चिविवि के अधिकारी व कर्मचारियों की तरफ गोद लिए गए 79 टीबी मरीजों को पोषण पोटली वितरित की गई। कुलपति डॉ. अमित देवगन ने कहा कि बच्चों में टीबी बढ़ने के पीछे कई प्रमुख कारण हैं। इनमें कुपोषण, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता, संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आना और भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहना शामिल है।
जिन परिवारों में पहले से किसी को टीबी है। वहां बच्चों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। टीबी के लक्षण बच्चों में अक्सर सामान्य बीमारियों जैसे ही दिखाई देते हैं। जिससे इसकी पहचान में देरी हो जाती है। लगातार खांसी, बुखार, वजन कम होना, भूख न लगना और कमजोरी इसके प्रमुख संकेत हैं। कई मामलों में बच्चों में लक्षण स्पष्ट नहीं होते, जिससे बीमारी अंदर ही अंदर बढ़ती रहती है। टीबी से बचाव के लिए बच्चों का पोषण स्तर बेहतर रखना बेहद जरूरी है। जन्म के समय दिया जाने वाला बीसीजी टीका भी इस बीमारी से आंशिक सुरक्षा प्रदान करता है। इसके अलावा, घर में यदि किसी को टीबी है तो बच्चे को उससे दूर रखना और नियमित जांच कराना आवश्यक है।
टीबी पूरी तरह ठीक होने वाली बीमारी है। बशर्ते मरीज समय पर दवा शुरू करें। पूरा कोर्स पूरा करे। बीच में दवा छोड़ने से बीमारी और खतरनाक रूप ले सकती है। सरकार टीबी को खत्म करने की दिशा में लगातार प्रयास कर रही है। टीबी मरीजों को पोषण भत्ता प्रदान किया जा रहा है। सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मुफ्त दवाएं व जांच की सुविधा उपलब्ध हैं। कार्यक्रम में परीक्षा नियंत्रक डॉ. देवाशीष शुक्ला, कुलसचिव संजीव कुमार समेत अन्य अधिकारी, कर्मचारी मौजूद रहे।












