लखनऊ। शासन ने चिकित्सा संस्थानों में तैनात डाक्टरों के प्रमाण पत्रों के संबंध में जानकारी क्या मांग ली कि हड़कम्प मचा गया। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय प्रशासन ने आनन-फ ानन में अपना जवाब देने का प्रोफार्मा में ही परिवर्तन कर दिया है। चर्चा है कि विभागों में तैनात कुछ डॉक्टरों के कार्यभार ग्रहण करने और नियुक्ति संबंधी पत्र में गड़बड़ी हो सकती है। इस संबंध में भी एक पत्र शासन को भेजा गया है।
शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद चिकित्सा शिक्षा विभाग ने भी सभी मेडिकल कालेजों व चिकित्सा संस्थान में तैनात डाक्टरों के प्रमाणपत्रों की जांच कराने का निर्देश दिया है। इसी के तहत केजीएमयू ,लोहिया संस्थान, पीजीआई सहित प्रदेश भर के संस्थानों को नोटिस भेजा गया है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेष सचिव मार्कंडेय शाही ने 22 जून को भेजे गए पत्र में कहा है कि सभी विभागों में कार्यरत संकाय सदस्यों के प्रमाण पत्रों का सत्यापन करके उनकी रिपोर्ट भेजी जाए। 23 जून को केजीएमयू कुलसचिव ने निर्देशों का पालन करते हुए एक प्रोफार्मा बना कर जारी कर किया।
इस प्रोफार्मा में संबंधित विभाग के विभाग में तैनात डाक्टर की मार्कशीट, प्रमाण पत्र, एमसीआई एडीसीआई का प्रमाण पत्र, अनुभव प्रमाण पत्र, नियुक्ति पत्र, कार्यभार ग्रहण करने का चार्ज सर्टिफिकेट देने की जानकारी दर्ज करनी थी। यह सभी पेपर डाक्टरों को स्व हस्ताक्षरित करके जमा करना था। चर्चा है कि इस प्रोफार्मा देखते ही केजीएमयू के डाक्टरों में हड़कम्प मच गया। काफी संख्या में डाक्टरों ने इस प्रोफार्मा के तरीके पर नाराजगी जाहिर कर दी। सभी अपना- अपना परामर्श देने लगे। तो ऐसे में केजीएमयू प्रशासन बैक फुट पर आ गया आैर अपना फैसला बदलना पड़ा है। अब कुलसचिव की ओर से जारी किए गए प्रोफार्मा में सिर्फ डिग्री और एमसीआई का प्रमाण पत्र मांगा गया है।
उधर केजीएमयू के एक संकाय सदस्य चिकित्सा शिक्षा विभाग के विशेष सचिव मार्कंडेय सही को अलग से पत्र भेजा दिया। इसमें केजीएमयू प्रशासन की और से दोबारा आदेश जारी करने के संबंध में पूरा विवरण दिया गया है। भेजे गए पत्र में यह भी बताया गया है कि कई सदस्यों का अनुभव प्रमाण पत्र और नियुक्ति पत्र में खामियां हैं। जो कि अब जिम्मेदारी वाले पद पर तैनात है। ऐसे गाज गिरने के डर से प्रोफार्मा बदल दिया गया है।












