लखनऊ। प्रदेश में डिप्थीरिया यानि गलघोंटू बीमारी एक बार फिर बढ़ती जा रही है। विभिन्न जनपदों में बीमारी के आंकड़े देखने के बाद स्वास्थ्य विभाग में हड़कम्प मच गया है। अब इस बीमारी के कारण तलाशने के लिए विभाग ने रेपिड रेस्पांस (आरआरटी) टीम को लगा दिया है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के निदेशक डा. मिथलेश चतुर्वेदी ने कहना है कि मुरादाबाद, बुलंदशहर, बदायूं, मुजफ्फर नगर, शाहजहांपुर, लखीमपुर खीरी, सीतापुर, गौतम बुद्धनगर आैर गाजियाबाद में डिप्थीरिया के केस मिले है।
यहां पर केस के कारणों की जानकारी वृद्धि के कारणों का पता करेगी। डा. चतुर्वेदी ने बताया कि मुरादाबाद के जिला चिकित्सालय में सेंटर फार इन्फेकशियन डिसीस के रूप में विकसित कर किया गया है, पश्चिमी उत्तर प्रदेश में चिकित्सा आवश्यकतों को पूरा करेगी। वहीं जिले के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को बीमारी के खिलाफ सतर्क कर दिया गया है आैर डिप्थीरिया के मामलों पर दैनिक रिपोर्ट भेजने के लिए कहा गया है। विभागीय अधिकारियों के मुताबिक अक्टूबर से इन जिलों में एक गहन मामला खोज अभियान शुरू किया गया था। जिसके दौरान 206 सभावित लोंगों में डिप्थीरिया के लक्षणों की पहचान की गई थी आैर उनके थ्राट स्वेब एकत्रित किये गये, जिनमें से 62 रोगियों के धनात्मक नमूने पाए गये।
क्या है डिप्थीरिया बीमारी
डिप्थीरिया कॉरीनेबैक्टेरियम डिप्थीरिया बैक्टीरिया के संक्रमण से होता है। इसके बैक्टीरिया टांसिल आैर सांस नली के कारण संक्रमित करते हैं। संक्रमण फैलने से एक ऐसी झिŸी बन जाती है, जो कि सांस लेने में बाधक बनती है। इस बीमारी के हने पर गला सूखने लगता है, आवाज फटने लगती है। गले में जाल पड़ने के बाद सांस लेने में दिक्कत होती है। इलाज न कराने पर शरीर के अन्य अंगों में संक्रमण फैल जाता है। यदि इसके जीवाणु हार्ट तक पहुंच जायें तो जान भी जा सकती है। संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने पर अन्य बच्चों को भी इस बीमारी के होने का खतरा रहता है।
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