लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय के पल्मोनरी क्रिटकल मेडिसिन विभाग के डाक्टरों ने दो वर्षींय बच्चे की ब्राांकोस्कोपी करके उसे नया जीवन दे दिया। बच्चे को मक्के का दाना श्वसननली में चला गया था, जिसके कारण फेफड़े में जाने वाली श्वसन नली ब्लाक हो गयी आैर सांस लेने में दिक्कत होने पर तबियत तेजी से बिगड़ रही थी। फेफड़ा धीरे- धीरे क्रियाशील कम होता जा रहा था। हरदोई से रेफर होकर केजीएमयू पहुंचे बच्चे को इलाज में तेजी से तत्परता विभाग प्रमुख डा. वेद प्रकाश के निर्देश पर दिखायी गयी आैर बच्चा फिर मुस्कराने लगा।
डा. वेद प्रकाश ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में पहुंचा दो वर्षीय यश हरदोई के हरपालपुर निवासी मामा के घर पर खेल रहा था। खेलते – खेलते अचानक डलिया में रखे मक्के के दाने को यश ने मुंह में डाल लिया। लगभग मुट्ठीभर दाने मुंह में पहुंचे,लेकिन उसने सभी दाने तो उलट दिए। मगर तेजी से खाने पर कुछ दाना श्वसन नली में चला गया। इससे एक फेफड़े में जाने वाली श्वसन नली ब्लॉक हुई तो वह उसकी सांस उखड़ने लगी। इस बीच अचानक उसे उल्टी हुई, तो कुछ मक्के के दाने बाहर निकले। फिर भी सांस लेने की दिक्कत बनी रहने से वह जोर-जोर रो भी रहा था। 16 जून को हुई इस घटना में बिगड़ती हालत देख मामा राम प्रताप सिंह बच्चे को लेकर स्थानीय डाक्टर के पास अस्पताल लेकर पहुंचे।
यहां डॉक्टरों ने इलाज तो शुरू कर दिया लेकिन कोई बाद सुधार न होते देख केजीएमयू रेफर कर दिया। यहां पर पहुंचने पर पहले तो डाक्टरों ने कोरोना संक्रमण की आशंका दिखायी, लेकिन केस हिस्ट्री जानकर तत्काल ब्राांकोस्कोपी करने का निर्णय लिया। डा. वेद प्रकाश के निर्देश पर डाक्टरों की टीम ने श्वसननली में फंसा मक्का का दाना बाहर निकाल दिया। डा. वेद ने बताया कि यह क्लीनिक वर्क छोटा है लेकिन अगर देर हो जाती तो बच्चे की जान पर भी बन सकती थी। इस लिए लोगों को चांिहये कि छोटे बच्चों को मक्का का दाना या अन्य ऐसी खाने का सामान न दे या रखे जो कि निगलने में उन्हें दिक्कत हो।












