लखनऊ । टीबी (क्षय रोग) में तमाम दावों के बावजूद से एमडीआर व एक्सडीआर के मरीज लगातार बढ रहे है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर टीबी रोग के संक्रमण को रोकना है, तो एमडीआर व एक्सडीआर के मरीजों का इलाज मानकों के अनुसार कराना होगा। यह जानकारी माइक्रोबायलॉजी विभाग की वरिष्ठ डा शीतल वर्मा ने दिया।
उन्होंने बताया कि टीबी रोग में प्रथम चरण की पुष्टि होने पर छह महीने तक दवा का सेवन किया जाता है। इसमें दवा सेवन करने का नियम भी बदल गया है। अब दवा को प्रतिदिन सेवन करना होता है। इसके अलावा ज्यादातर लोग नियमानुसार दवा का सेवन करना बंद कर देते है। ऐसे में यह मरीज खुद को टीबी के दूसरे चरण में एमडीआर की चपेट में आ जाते है आैर संक्रमण फैलाने लगते है। अगर यह मरीज भी समय पर दवा का सेवन नियमानुसार न करते हुए इलाज को बंद कर देते है तो यह एक्सडीआर की चपेट में आ जाते है। टीबी की यह स्टेज काफी गंभीर होती है। इसमें मरीज काफी संवेदनशील हो जाते है। इनका इलाज भी जटिल होता है।
अगर यह विशेषज्ञ डाक्टर की देखरेख में सही तरीके से नहीं कराया जाता है, बीमारी लाइलाज हो जाती है। डा. शीतल ने बताया कि टीबी में एमडीआर व एक्सडीआर के मरीजों की संख्या बढ रही है। अगर वर्ष 2017 के आंकड़ों को ही देखा जाए तो एक्स डी आर के मरीज 390 आये आैर एमडीआर के एक हजार 62 मरीजों की पुष्टि हुई। इस कारण मरीजों का इलाज किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान इनको जागरूक भी किया जा रहा है कि इलाज को किसी तरह से बंद नहीं करना है, ताकि बेहतर इलाज के बाद उनके एक बेहतर जीवन को जी सके।
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