लखनऊ। वर्तमान में काफी संख्या में लोग कम्प्यूटर के सामने ज्यादा देर एक ही पोजीशन में बैठकर काम करते है। इसके अलावा मोटरसाइकिल ज्यादा चलाने से कमर दर्द बढ़ जाता है। आफिसांे से लेकर घरों तक में एयर कंडीशन मे बैठकर काम करना ज्यादा पसंद करते हैं। ऐसे में सूर्य की रोशनी शरीर को ठीक से नहीं मिल पाती है। ऐसे में शरीर में विटामिन डी व अन्य तत्वों की कमी हो जाती है। यह हड्डियों में कमजोर बनने का कारण बनता रहता है। इस कारण कमर दर्द (बैक पेन) की समस्या धीरे- धीरे गंभीर हो जाती है। अगर समय पर जांच कराने के बाद सही दवा, व्यायाम और लाइफस्टाइल में सुधार कर समस्या से निदान पाया जा सकता है। यह जानकारी डा. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में एनस्थीसिया विभाग के प्रमुख डॉ. दीपक मालवीय ने दी।
डा. मालवीय शनिवार को लोहिया संस्थान के प्रेक्षागृह में मिनिमल इनवेजिव एंड स्पाइन इंटरवेंशन विषय पर आयोजित कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। डॉ. दीपक मालवीय ने कहा कि हर तीसरा व्यक्ति बैक पेन की पीड़ित हैं। इसकी बड़ा कारण तेजी से बदलती जीवन शैली है। उन्होंने कहा कि अगर देखा जाए, तो कमर दर्द विश्व में क्रोनिक पेन का सबसे मुख्य कारण हैं। मानक के अनुसार तीन महीने से अधिक समय का दर्द को क्रोनिक पेन की श्रेणी में रखा जाता है।
डा. मालवीय ने कहा कि लगभग 60 प्रतिशत से ज्यादा लोग अपने जीवन में कभी न कभी पीठ के निचले भाग में दर्द से परेशान होते हैं, जिसमें से 27 प्रतिशत क्रोनिक पेन की चपेट में रहते हैं। इनमें 40 से 50 प्रतिशत ऐसे लोग होते है, जो कि दर्द के कारण से अपना दैनिक कार्य कर तक करने में सक्षम नही होते हैं। स्वास्थ्य के आंकड़ों को देखा जाए तो पुरुषों के मुकाबले महिलाएं अधिक क्रोनिक पेन से पीड़ित होती हैं। उन्होंने महिलाएं लंबे समय तक किचेन में क्रियाशील हैं अौर प्रतिदिन झाड़ू-पोछा आदि करने से भी समस्या गंभीर हो जाती है। कामकाजी महिलाएं सूर्य की रोशनी में भी कम जाती हैं। देखा गया है कि वह दर्द को किसी से जिक्र तक नहीं करती हैं। इससे समस्या गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि जीवनशैली में बदलाव कर बीमारी से बच सकते हैं। नियमित कसरत करना चाहिए। एयर कंडीशन का इस्तेमाल सीमित मात्रा में करें। खान-पान का खास खयाल रखें। दवाओं से आराम न मिलने पर माइनर सर्जरी कर मरीज बीमारी से राहत पा सकते हैं।
लोहिया संस्थान की निदेशक डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि कमर दर्द के मुख्य कारण साइटिका, कमर के जोड़, गठिया, डिस्क, कैंसर, रीढ़ की हड्डी का फ्रैक्चर होते है। पेन मेडिसिन एक नयी स्पेशियालिटी है, जिसमें हम मिनिमली इनवेसिव पेन एंण्ड स्पाइन इंटरवेंशन द्वारा ऐसे कई दर्द रोगियों का बिना बड़ी सर्जरी के इलाज कर सकते हैं। क्रोनिक पेन मैनेजमेंट का इलाज लोहिया संस्थान में किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि डॉ. शिवानी रस्तोगी समेत अन्य डॉक्टरों की टीम मरीजों की परेशानी से निजात दिला रही है। कार्यक्रम में डॉ. अनिल अग्रवाल, डॉ. कर्नल आरके त्रिपाठी, लोहिया की डीन डॉ. नुजहत हुसैन, सीएमएस डॉ. राजन भटनागर समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।