लखनऊ । अगर आपका बच्चा खाना सही से नहीं खाता है, लगातार कब्जियत आैर दस्त की शिकायत बनी रहती है आैर हाइट भी नहीं बढ़ती है तो यह गेंहू के आहार से होने वाली एलर्जी से भी हो सकती है। इसके लिए विशेषज्ञ डाक्टर से परामर्श करने ब्लड की विशेष जांच करानी चाहिए। यह जानकारी 39 वां स्टेट कांफ्रेंस ऑफ इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स सम्मेलन में दूसरे दिन बाल रोग विशेषज्ञ डा. आशुतोष वर्मा ने दी। सम्मेलन में बाल रोग विशेषज्ञों ने बच्चों में बदलती बीमारी, इलाज में आयी तकनीक, बच्चों के अभिभावकों से डॉक्टर्स के व्यवहार पर चर्चा की।
कार्यक्रम के संयोजक डॉ आशुतोष वर्मा ने बताया कि दूध का सेवन भी खाना खाने के बाद ही करना चाहिए, उससे पहले या विकल्प के रूप में सेवन करने से बच्चे को पेट की दिक्कत हो सकती है। अभी तक डेंगू के मामले में सबसे ज्यादा डॉक्टर प्लेटलेट्स को लेकर परेशान रहते है, पर हकीकत यह है कि प्लेटलेट्स के साथ साथ मरीह का ब्लड प्रेशर भी लगता चेक होता रहना चाहिए क्योकि ब्लड प्रेशर ही एक ऐसा चीज है जिनको डॉक्टर्स डेंगू के दौरान नहीं चेक करते और ब्लड प्रेशर कम या ज्यादा होने से मरीज की मौत हो जाती है।
इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स ने अध्यक्ष डॉ संतोष ने बच्चों के अभिभावक से डॉक्टर्स के व्यवहार पर अपना व्याख्यान दिया, उन्होंने बताया कि डाक्टर को बच्चों के माँ-बाप से कैसा व्यवहार करना चांिहए। किस तरह उन्हें बच्चों का ट्रीटमेंट करना है। इसके लिए सिर्फ जांच रिपोर्ट ही नही बल्कि चेकअप भी ध्यान पूर्वक करना चाहिए। हाल ही में हुए एक सर्वें के मुताबिक एक डाक्टर औसत 4 मिनट ही एक मरीज को देख पता है जो सही नहीं है. इसलिए बाल रोग विशेषज्ञों को चाहिए कि बच्चों का इलाज वो बड़े धैर्य से करें। नवजात बच्चों में हार्ट की बीमारी पर चर्चा करते हुए मेरठ से आयी बाल हार्ट रोग विशेषज्ञ डॉ मुनीश तोमर ने कहा कि बच्चों में जो हार्ट की प्रॉब्लम होती है।
वह अपने आप में एक अलग बीमारी होती है। वह भी बच्चें के खासी जुखाम, निमोनिया आदि के लिए डॉक्टर्स के पास जाते है पर वह समझ ही नहीं पाते कि बच्चें को हार्ट की भी बीमारी हो सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चा अगर तेज सांस ले रहा है, बच्चें का वजन नहीं बढ़ रहा है, बच्चें का शरीर नीला पड़ता है , बच्चा दूध नहीं पी पता है, बच्चें को बार बार निमोनिया हो रहा है, नार्मल बच्चों की तरह बढ़ नहीं रहा है तो ये बच्चें की हार्ट से जुडी प्रॉब्लम्स भी हो सकती है। इसलिए बच्चें की हार्ट की बीमारी का समय रहते पता लगाना जरुरी होता है। अगर इसमें से एक भी लक्षण नजर आये तो तुरंत बच्चों के डॉक्टर्स से उन्हें मिलना चाहिए। सम्मेलन में डा. विनीत सक्सेना, डा. याचा तथा डा. वीएन त्रिपाठी ने भी सम्बोधित किया।
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