अयोध्या में विवादित भूमि पर बनेगा मंदिर, मस्जिद के लिए पांच एकड़ जमीन

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न्यूज। उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने पांच सौ साल से अधिक पुराने अयोध्या राम जन्मभूमि विवाद में आज एकमत से ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समूची 2.77 एकड़ विवादित भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को सौंपने और सुन्नी वक्फ बोर्ड को मस्जिद के निर्माण के लिए अयोध्या में ही उचित स्थान पर पांच एकड़ भूमि देने का निर्णय सुनाया। इस फैसले के साथ ही देश में दशकों से चली आ रहे विवाद का समाधान हो गया और आमतौर पर सभी पक्षों ने इसका स्वागत किया है। इस फैसले से अयोध्या में श्री राम मंदिर के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त हो गया।

देश के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने गत 6 अगस्त से मामले की लगातार 40 दिन तक सुनवाई के बाद गत 16 अक्टूबर को इस मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था। संविधान पीठ में न्यायमूर्ति गोगोई के अलावा न्यायमूर्ति शरद अरविंद बोबडे , न्यायमूर्ति अशोक भूषण, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल थे।

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पीठ ने कहा कि 2.77 एकड़ विवादित भूमि श्रीराम जन्मभूमि न्यास को दी जायेगी तथा सुन्नी वक्फ को बोर्ड अयोध्या में ही पांच एकड़ वैकल्पिक जमीन उपलब्ध करायी जाये। मस्जिद के लिए भूमि का आवंटन या तो केन्द्र सरकार अयोध्या अधिनियम 1993 के तहत अधिगृहीत भूमि में से करे या फिर राज्य सरकार इसके लिए अयोध्या में उचित स्थान पर जगह दे। गर्भगृह और मंदिर का बाहरी अहाता भी राम जन्मभूमि न्यास को सौंपा जाये। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 30 सितम्बर 2010 को विवादित भूमि को तीन पक्षकारों-सुन्नी वक्फ बोर्ड, निर्मोही अखाड़ा और राम लला विराजमान- के बीच बराबर-बराबर बांटने का आदेश सुनाया था। इसके खिलाफ शीर्ष अदालत में 14 विशेष अनुमति याचिकाएं दायर की गयीं।

पीठ ने अपने एकमत फैसले में कहा है कि केन्द्र सरकार तीन से चार महीने के भीतर मंदिर निर्माण के लिए एक न्यास का गठन करे और उसके प्रबंधन तथा आवश्यक तैयारियों की व्यवस्था करे। फैसले में कहा गया है कि निर्मोही अखाड़े को केन्द्र सरकार द्वारा मंदिर के निर्माण के लिए बनाये जाने वाले न्यास में उचित प्रतिनिधित्व दिया जाये। उसने यह भी स्पष्ट किया कि विवादित स्थल पर रामलला के जन्म के पर्याप्त साक्ष्य हैं और अयोध्या में भगवान राम का जन्म हिन्दुओं की आस्था का मामला है तथा इस पर कोई विवाद नहीं है।

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