लखनऊ। प्रसव के समय बरती गई लापरवाही से शिशु के हाथों में ब्रोकियल फेलेक्सी इंजरी होने के दो वर्ष बाद संजय गांधी पीजीआई के डाक्टरों ने नया जीवन दे दिया है। प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डाक्टरों ने माड-क्युआड प्रोसीजर तकनीक से सर्जरी करके सुन्न हो चुके हाथों को फिर क्रियाशील कर दिया है। अब वह सामान्य बच्चें की तरह सभी कार्य कर सकेगा।पीजीआई में लॉक डाउन के बाद प्लास्टिक सर्जरी विभाग में पहली सर्जरी है। डाक्टरों के अनुसार सामान्य तौर पर वर्ष भर में छह-सात केस इस तरह के आ जाते है।
प्लास्टिक सर्जरी विभाग के डा. अंकुर भटनागर के बताया कि प्रसव के दौरान छोटी सी चूक के कारण शिशु के हाथों में ब्रोकियल फेलेक्सी इंजरी हो गयी। इसमें शिशु के सोल्डर( कंधे) और कोहनी बेजान हो गयी थी आैर हाथ सुन्न हो गया था। शिशु के परिजन लगातार आर्थोपैडिक डाक्टर से इलाज कराने के साथ ही फिजियोथैरेपिस्ट के परामर्श पर थेरेपी कराते रहे। लेकिन शिशु को कोई फायदा नहीं हुआ। कुछ लोगों से जानकारी मिलने पर पीजीआई की ई -ओपीडी के जरिए संपर्क किया। डाक्टरों ने जांच में शिशु के ब्रोकियल फेलेक्सी इंजरी है। उन्होंने सर्जरी करने का प्लान किया गया। सर्जरी में खराब हो चुकी नर्व का चयन करके वर्किंग नर्व से जोड़ा गया।
इसके साथ मांसपेशियों की इंजरी में मांसपेशियों को सोल्डर व कुहनी के पास सही स्थान पर सेट किया गया। इस जटिल सर्जरी में डा. भटनागर व उनकी टीम को लगभग सात घंटे लग गये। उन्होंने बताया कि हेअर (बाल) से भी पतली नर्व को आपरेटिक माइक्रोस्कोप के जरिए देख कर रिपेयर किया गया। उन्होंने बताया कि इस सर्जरी को माड-क्युआड प्रोसीजर कहते है। इसमें चार नर्व और मांसपेशियों की इंजरी को सर्जरी कर सही किया जाता है।
उन्होंने बताया कि नर्व इंजरी के तीन से छह महीने से पहले सर्जरी हो जाए, तो रिजल्ट काफी बेहतर मिलता है। अगर देर हो जाती है तो सर्जरी के दौरान नर्व और मांसपेशी दोनों की सर्जरी करनी होती है। ऐसे में हाथों में ताकत आने में कुछ समय लग जाता है। फिलहाल अब वह सामान्य बच्चों की तरह खेलकूद सकेगा और हाथों से बॉल भी फेंक सकेगा।












