रिटायरमेंट उम्र 63 वर्ष करने समेत 20 मांगों पर करेगा आंदोलन
लखनऊ। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में एक बार फिर बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा होता नजर आ रहा है। संजय गांधी पीजीआई कर्मचारी महासंघ ने अपनी 20 सूत्रीय लंबित मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। महासंघ ने संस्थान प्रशासन को 15 कार्य दिवसों का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय सीमा के भीतर उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं किया गया, तो 5 अक्टूबर से प्रशासनिक भवन के सामने अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन शुरू कर दिया जाएगा।
प्रशासन को अल्टीमेटम, कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला
कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष धर्मेश कुमार और महामंत्री सीमा शुक्ला ने संस्थान के निदेशक को औपचारिक पत्र भेजकर 15 कार्य दिवस की समय-सीमा तय की है। पदाधिकारियों के अनुसार, कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया है। यदि निर्धारित समय में समाधान नहीं निकला, तो कर्मचारी प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक मुख्य प्रशासनिक भवन के समक्ष धरना देंगे। महासंघ ने साफ किया है कि यदि संस्थान में आंदोलन की स्थिति बनती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।
मुख्य मांगें: सेवानिवृत्ति उम्र 63 साल और एम्स की तर्ज पर सुविधाएं
कर्मचारी महासंघ की 20 सूत्रीय मांगों में सबसे प्रमुख मांग नियमित गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की सेवानिवृत्ति की उम्र 60 से बढ़ाकर 63 वर्ष करने की है। इसके अलावा महासंघ ने एम्स दिल्ली की तर्ज पर कई वित्तीय व प्रशासनिक सुधारों की मांग की है:
पदोन्नति व डीपीसी: मानकीकरण के बाद विभिन्न संवर्गों में उत्पन्न विसंगतियों का समाधान किया जाए। योग्यता पूरी होने और पद रिक्त होने पर तत्काल विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की बैठक कराई जाए।
एमएसीपी का लाभ: 30 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके नर्सिंग सहित सभी संवर्गों के कर्मचारियों को तृतीय एमएसीपी प्रदान की जाए।
भत्ते और वेतन संरक्षण: लेवल-9 और उससे ऊपर के कार्मिकों को एम्स दिल्ली की तर्ज पर ₹5,300 प्रतिमाह एचपीसीए दिया जाए। नर्सिंग संवर्ग में वरिष्ठ कर्मचारियों का वेतन कनिष्ठों के बराबर होने की स्थिति में वेतन संरक्षण (Pay Protection) लागू हो और एम्स की तर्ज पर ब्रीफकेस भत्ता दिया जाए।
स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार: कर्मचारियों और उनके आश्रितों के लिए ओपीडी का समय दोपहर 1 से 2 बजे के बजाय सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक बढ़ाया जाए। साथ ही संस्थान के इमरजेंसी विभाग में कर्मचारियों के लिए आरक्षित बेड की संख्या बढ़ाई जाए।
पदनाम व प्रोत्साहन: हिंदी आशुलिपि व टंकण कार्य के लिए प्रोत्साहन भत्ता मिले, और ओटी, एमएसएसओ तथा फार्मासिस्ट संवर्ग के पदनामों को एम्स के समान किया जाए।












