ABVMU में बिना शासन की अनुमति Kgmu जैसा वेतन: महानिदेशालय ने बैठाई जांच

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​• चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय के वित्त नियंत्रक ने यूनिवर्सिटी प्रशासन को भेजा पत्र
​• केजीएमयू के समान भत्ते और परिलब्धियां देने पर बढ़ा विवाद

​लखनऊ। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी (ABVMU) में चिकित्सा शिक्षकों को किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के समान वेतन, भत्ते और अन्य सुविधाएं दिए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शासन की पूर्व अनुमति के बिना शिक्षकों को यह लाभ दिए जाने के मामले को गंभीरता से लेते हुए चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय ने जांच शुरू कर दी है। महानिदेशालय के वित्त नियंत्रक ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इससे संबंधित सभी जरूरी दस्तावेज और सूचनाएं तलब की हैं।

​⚠️ ‘अनियमित’ तरीके से बांटे गए लाभ: वित्त नियंत्रक
​वित्त नियंत्रक शैलेष गिरि की ओर से अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी की कुलसचिव को एक आधिकारिक पत्र भेजा गया है। इस पत्र में स्पष्ट कहा गया है कि:
​यूनिवर्सिटी में चिकित्सा शिक्षकों को बिना शासन की पूर्वानुमति के अनियमित तरीके से केजीएमयू के शिक्षकों के समान परिलब्धियां व भत्ते प्रदान किए गए हैं।
​इस पूरे मामले की गहनता से जांच की जाएगी।
​यूनिवर्सिटी प्रशासन को निर्देश दिया गया है कि वे किसी सक्षम अधिकारी के हाथ वे सभी दस्तावेज जल्द से जल्द महानिदेशालय भिजवाएं, जिनके आधार पर शिक्षकों को यह लाभ देने का फैसला किया गया था।

​🔍 इन 4 बिंदुओं पर टिकी है जांच की सुई
​महानिदेशालय का पत्र पहुंचने के बाद अटल यूनिवर्सिटी के प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जांच के दौरान मुख्य रूप से निम्नलिखित सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे:
​अनुमोदन का स्तर: जब केजीएमयू के समान वेतन-भत्ते देने के लिए शासन की अनुमति अनिवार्य थी, तो यूनिवर्सिटी स्तर पर यह फैसला किस आधार पर और किस स्तर से लिया गया?

​प्रक्रिया का पालन: वेतन और परिलब्धियां स्वीकृत करने की तय प्रक्रिया क्या रही और इसमें कहां चूक हुई?
​सक्षम अधिकारी की भूमिका: इस वित्तीय लाभ को देने के लिए किस अधिकारी या समिति ने अंतिम अनुमोदन (Approval) दिया?
​नियमों का उल्लंघन: क्या इस फैसले में जानबूझकर नियमों को ताक पर रखा गया या कोई तकनीकी चूक हुई?

​क्या कहती है यूनिवर्सिटी?
इस पूरे विवाद पर यूनिवर्सिटी की कुलसचिव ज्योत्सना का कहना है कि चिकित्सा शिक्षा महानिदेशालय से प्राप्त पत्र का संज्ञान ले लिया गया है और यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से इसका आधिकारिक जवाब भेज दिया गया है। बहरहाल, जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि इस मामले में नियमों का उल्लंघन हुआ है या नहीं।

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