दो दशक से जमे इंजीनियरों पर कब चलेगा नियमों का बुलडोजर ?

0
57

पीडब्ल्यूडी में तबादला सत्र पर सेटिंग साम्राज्य की नजर

त्रिनाथ शर्मा

लखनऊ। उत्तर प्रदेश सरकार भले ही प्रशासनिक पारदर्शिता और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति का दावा कर रही हो, लेकिन लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) का मौजूदा तबादला सत्र कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। विभागीय सूत्रों के मुताबिक राजधानी लखनऊ समेत प्रदेश के कई महत्वपूर्ण कार्यालयों में ऐसे जूनियर इंजीनियर तैनात हैं जो पिछले 20 से 22 वर्षों से एक ही स्थान पर जमे हुए हैं। अगर देखा जाए तो तबादला नीति के स्पष्ट प्रावधान होने के बावजूद इन अधिकारियों की कुर्सियां आज तक नहीं हिल सकीं।

मानव सम्पदा पोर्टल पर करीब 400 जूनियर इंजीनियरों द्वारा स्थानांतरण के लिए आवेदन किए जाने की चर्चा है। इनमें बड़ी संख्या उन कर्मचारियों की बताई जा रही है जो वर्षों से तबादले की प्रतीक्षा कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर कुछ प्रभावशाली अधिकारी अपनी मौजूदा तैनाती बचाने के लिए हर स्तर पर सक्रिय बताए जा रहे हैं। विभागीय गलियारों में चर्चा है कि संपर्क, प्रभाव और कथित बिचौलिया तंत्र के सहारे तबादला प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

मलाईदार कुर्सियों पर वर्षों से स्थायी कब्जा कर रखा है, सबसे अधिक चर्चा निर्माण खंड-2 (सीडी-2) सहित विभाग के उन कार्यालयों की है जिन्हें लंबे समय से प्रभावशाली और संसाधन-संपन्न माना जाता है। सूत्रों का दावा है कि यहां कई जूनियर इंजीनियर दो दशक से अधिक समय से तैनात हैं। सवाल यह उठता है कि जब सामान्य कर्मचारियों और अधिकारियों पर तबादला नीति पूरी कठोरता से लागू होती है, तब कुछ चुनिंदा लोगों को यह विशेष छूट आखिर किसके संरक्षण में मिल रही है?
प्रशासनिक विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी अधिकारी की लंबे समय तक एक ही स्थान पर तैनाती पारदर्शिता और निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। इससे प्रभाव और हितों का ऐसा नेटवर्क विकसित हो जाता है जो सुशासन की मूल भावना के विपरीत माना जाता है।

विभागीय सूत्रों का कहना है कि तबादलों को प्रभावित करने के उद्देश्य से कई स्तरों पर सक्रियता देखी जा रही है, जिससे पूरी प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।
जानकारों का मानना है कि शासन को मानव सम्पदा पोर्टल, तैनाती अवधि और विभागीय रिकॉर्ड की गहन समीक्षा कर वर्षों से एक ही स्थान पर जमे अधिकारियों की स्थिति का परीक्षण करना चाहिए। विभागीय लोगों में चर्चा है कि यदि तबादला प्रक्रिया में किसी प्रकार के बाहरी प्रभाव, बिचौलिया तंत्र या अनुचित हस्तक्षेप की पुष्टि होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

Previous articleस्टार प्लस के नए शो ‘सैराब’ के प्रोमो ने सोशल मीडिया पर मचाई धूम, रोहित और मदिराक्षी की केमिस्ट्री के कायल हुए फैंस

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here