इलाज कराने आये तो देना होगा कोरोना जांच शुल्क

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लखनऊ। संजय गांधी पीजीआई और गोमती नगर स्थित लोहिया संस्थान में अब मरीजों को कोरोना संक्रमण की जांच 15 सौ रुपए शुल्क जमा करने के बाद ही हो सकेगी। मरीज के साथ उसके तीमारदार को भी जांच कराने के लिए शुल्क देना होगा। हालांकि इमरजेंसी, फीवर क्लीनिक और संदिग्ध स्थिति में आने वाले मरीज से शुल्क नहीं लिया जाएगा। इस प्रकार अब दोनों चिकित्सा संस्थानों में इलाज कराने व भर्ती होने वाले मरीज व तीमारदार को 3000 रुपये अतिरिक्त खर्च हो जाएंगे। केजीएमयू में अभी भर्ती होने वाले मरीजों को कोरोना जांच के लिए अभी कोई निशुल्क नहीं लिया जा रहा है।

अभी तक पीजीआई और लोहिया संस्थान में आने वाले मरीजों से अभी तक कोरोनावायरस जांच का शुल्क नहीं लिया रहा था। अब मरीज व तीमारदारों को इलाज के लिए भर्ती ंहोने पहले कोरोना की जांच के लिए तीन हजार रुपये जमा करना पड़ेगें। पीजीआई में फीवर क्लीनिक में आने वाले मरीजों को कोविड हॉस्पिटल भेज कर वहां निशुल्क जांच की जाएगी, लेकिन मुख्य भवन में इलाज के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को जांच के लिए शुल्क देना होगा, क्योंकि बिना कोरोना जांच रिपोर्ट आए मरीज के तीमारदार को अंदर इलाज के लिए जाने की अनुमति नहीं है। पीजीआई में प्रोटोकॉल का पालन करते हुए प्रतिदिन करीब दो से ढाई सौ उन मरीजों को बुलाया जा रहा है, जिनकी पहले से सर्जरी की डेट मिली है अथवा इलाज के लिए अलग- अलग प्रकार की जांचे होनी है।

अभी तक इन सभी मरीजों की कोरोना की जांच मुफ्त की जाती थी, लेकिन अब मरीज को 15 सौ रुपए देने पड़ेंगे। इसके लिए संस्थान के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अमित अग्रवाल ने आदेश जारी कर दिया है। इसमें कहा गया है कि माइक्रोबायोलॉजी लैब में होनी वाली सामान्य पीसीआर और ट्रू नेट मशीन टेस्टिंग दोनों का शुल्क 1500 रुपया लिया जाएगा है। ऐसे में सर्जरी, डायलिसिस, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी कराने वाले कैंसर मरीज और उनके तीमारदारों को इलाज से पहले जांच करानी होगी। मरीज और तीमारदार को मिलाकर 3000 खर्च करना पड़ेगा। संस्थान के निदेशक प्रोफेसर आरके धीमान ने बताया कि शासन ने शुल्क निर्धारित कर दिया है।

लोहिया संस्थान में भी फीवर क्लीनिक, कोरोना संदिग्ध और इमरजेंसी के मरीजों की कोरोना जांच निशुल्क करायी जाएगी। संस्थान में इमरजेंसी में करीब 200 मरीज आते हैं। इसी तरह सर्जरी, डायलिसिस , एमआरआई , ईको सहित अन्य जांचों के लिए आने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों को शुल्क देना पड़ेगा। इन दिनों संस्थान में विभिन्न विभागों में इस तरह के करीब साढ़े तीन सौ मरीज आ रहे हैं। इनके साथ एक-एक तीमारदार भी होते है। उनको भी जांच करानी होगी। फिलहाल केजीएमयू में अभी सर्जरी, डायलिसिस, रेडियो थेरेपी सहित अन्य मरीजों और उनके तीमारदारोंकी भर्ती के लिए निशुल्क जांच की जा रही है। केजीएमयू के ट्रामा सेंटर के वरिष्ठ डॉ संदीप तिवारी ने बताया कि अभी यूनिवर्सिटी ने इस संबंध में फैसला नहीं लिया है। शुल्क बढ़ाने से पहले कार्यपरिषद की बैठक में मामला रखा जाएगा। इसके बाद विचार विमर्श कर निर्णय लिया जाएगा।

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