लखनऊ। रविवार को होने वाला कंकणाकृति सूर्य ग्रहण का स्पर्श पूर्वाह्न 10:26 से प्रारम्भ होगा आैर शीर्ष अवस्था दोपहर 12:11 बजे तथा ग्रहण मोक्ष यानी समाप्ति काल अपराह्न 1:58 होगा। यह सूर्य ग्रहण भारत, मध्य अफ्रीकी गणराज्य, कांगो, इथियोपिया, पाकिस्तान और चीन सहित अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में दिखायी देगा। 21 जून को उत्तरी गोलार्ध में सबसे बड़ा दिन और सबसे छोटी रात होती है।
ज्योतिषाचार्य समीर झा का क हना है कि कंकणाकृति सूर्य ग्रहण मिथुन राशि मृगशिरा नक्षत्र में लगेगा। ग्रहण के दौरान सूर्य वलयाकार की स्थिति में केवल 30 सेकंड की अवधि तक ही रहेगा। सूर्य ग्रहण के दिन 6 ग्रह वक्री होंगे। शनि, गुरु, शुक्र, बुध वक्री होंगे। राहू-केतु हमेशा वक्री रहते हैं। सूर्य ग्रहण में 30 दिन के अन्दर ग्रहण के नकारात्मक प्रभाव पड़ते है।
उन्होंने बताया कि ग्रहण से पहले आैर समाप्त होने पर स्नान करना चाहिए। ग्रहण के दौरान भगवान शिव, सूर्यदेव, गायत्री मंत्र, इष्ट देव, गुरुमंत्र के मंत्रों का जाप करें। ग्रहण के दौरान पानी पीने की भी मनाही रहती है। अगर पीना ही हो तो ढंका हुआ, तुलसी डला पानी पिएं।
सूतक काल लगने से पहले ही अपने खाने पीने की वस्तुओं खाद्य पदार्थों जैसे कि आटा, दूध में कुश या तुलसी दल अवश्य डाल लें। सूर्य ग्रहण समाप्त होने के बाद किसी जरूरतमंद को यह दान दे दें। बूढ़े, बालक और रोगी 1 प्रहर (3 घंटे) पूर्व तक खा सकते हैं। कोशिश यह करना चाहिए कि ग्रहण के समय घर से बाहर नहीं निकलें। ग्रहण से पहले स्नान करें। तीर्थों पर न जा सकें तो घर में ही पानी में गंगाजल, तीर्थो का जल मिलाकर स्नान करें। ग्रहण के दौरान भगवान शिव, सूर्यदेव, गायत्री मंत्र, इष्ट देव, गुरुमंत्र के मंत्रों का जाप करें।












