लखनऊ। योग बीमारियों में दवा के साथ कितना कारगर है। इस पर लगातार शोध हो रहे है। किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय की रेस्पेटरी मेडिसिन विभाग में श्वसन की बीमारी अस्थमा के नियंत्रण में प्राणायाम योग आसन कारगर है। इस पर शोध किया गया। मरीजों पर किये गये शोध में पाया गया कि दवाओं के साथ प्राणायाम अपनाकर अस्थमा को नियंत्रण में सफलता मिली है। यह अध्ययन रेस्पेटरी मेडिसिन विभाग प्रमुख प्रो. सूर्यकांत एवं शोध छात्रा डॉ श्रुति अग्निहोत्री ने किया है। शोध में कुल 325 लोगों को शामिल किया गया आैर अप्रैल 2018 से सितंबर 2019 के बीच किया गया है।
डॉ सूर्यकांत ने बताया कि अध्ययन में कुल 325 लोगों को शामिल करके दो समूह में बांटा गया।
एक समूह प्राणायाम के साथ-साथ अस्थमा की कुछ दवाएं भी दी गयी। जब कि दूसरे समूह में लक्षणों के आधार पर पूरी तरह से ड्रग थेरेपी का प्रयोग किया। कुछ अंतराल के बाद देखा गया कि प्राणायाम करने वालों में बेहतर रिजल्ट देखे गये। उन्हें प्राणायाम योग आसन करने के साथ ही कम दवाओं के सेवन से आराम मिल गया। इन मरीजों पर यह मनोवैज्ञानिक कारक भी साबित हुआ। इस बारे में इंडियन कॉलेज ऑफ एलर्जी, अस्थमा एंड एप्लाइड इम्यूनोलॉजी के अध्यक्ष डा .सूर्यकांत ने बताया कि प्राणायाम करने वाले समूह को आठ महीने के दौरान हफ्ते में 5 दिनों तक योग आसन का प्रशिक्षण कराया गया। उन्होंने कि 35 मिनट तक योग में विशेष तौर सिर्फ 15 मिनट तक प्राणायाम ही किया।
शोध छात्रा डॉ श्रुति अग्निहोत्री का कहना है कि हर पांच मिनट के लिए ध्यान लगाने के बाद रोगियों ने नादिशोधन, भस्त्रिका और भ्रामरी को कराया गया। इस दौरान डिप्रेशन, एंग्जायटी और स्ट्रेस सहित अन्य मनोवैज्ञानिक कारक भी कम मिले। डा सूर्यकांत ने बताया कि प्राणायाम करने वाले समूह ने दूसरे समूह की तुलना में मनोवैज्ञानिक स्थित में काफी बेहतर सुधार का अनुभव किया। ऐसी स्थिति में यह परिणाम निकला कि प्राणायाम अस्थमा चिकित्सा के प्रबंधन में एक सहायक चिकित्सा के रूप में फायदेमंद है।
शोध में क्लीनिकल अध्ययन में प्राणायाम और अस्थमा का यह खास
डॉ सूर्यकांत का कहना है कि क्लीनिकल में यह ध्यान दिया गया कि प्राणायाम को आम तौर पर विभिन्न श्वास अभ्यास के माध्यम से मानव शरीर के भीतर प्राण को नियंत्रित करने के लिए डिजाइन किया गया है। मरीज को अस्थमा बीमारी में श्वासनली में सूजन आ जाती है। इस कारण सांस लेते समय घरघराहट, सांस फूलना, सीने में जकड़न व खांसी आती है। यह लक्षण समय व तीव्रता के साथ बदलते है।
उन्होंने बताया कि अस्थमा देश में लगभग 3.5 करोड़ की आबादी को प्रभावित करता है, जिसमें से लगभग 70 लाख मरीज तो उत्तर प्रदेश राज्य के हैं। यह एलर्जी, वायु प्रदूषण, मोटापा, वायरल संक्रमण और तनाव, चिंता और अवसाद आदि की वजह से होता है। इसमें इनहेलर का प्रयोग करना पड़ता है लेकिन अभी अस्थमा पीड़ित सिर्फ 30 प्रतिशत मरीज ही इसका इस्तेमाल करते हैं।












