लखनऊ। गलत खान- पान के कारण युवाओं में कोलोरेक्टल कैंसर यानी बड़ी आंत का कैंसर बढ़ रहा है। यह पहले यह 60 साल की उम्र के बाद होता था, लेकिन अब 40 साल से कम उम्र के लोगों को भी होने लगा है। यह पश्चिमी दुनिया में कैंसर से होने वाली मौतों का तीसरा प्रमुख कारण है। यह जानकारी सर्जिकल गैस्ट्रोइंट्रोलॉजी विभाग द्वारा ब्रााउन हॉल आयोजित व्याख्यान में यूएसए के रोबोटिक और लैप्रोस्कोपिक क्लोरेक्टल सर्जन विशेषज्ञ डॉ. संजीव पाटनकर ने दी। व्याख्यान में लेप्रोस्कोपिक व रोबोटिक तकनीक से सर्जरी करने की जानकारी भी डाक्टरों को दी। उन्होंने कहा कि आने वाले वक्त में रोबोटिक सर्जरी ही मरीजों के लिए वरदान साबित होगी।
उन्होंने कोलोरेक्टल कैंसर के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कोलो से मतलब है बड़ी आंत और रेक्टल का मतलब है मलाशय रेक्टम से है। अगर जल्द ही इसके लक्षणों को पहचान कर इसका इलाज हो जाए तो मरीज कि जान बचाई जा सकती है। इस कैंसर की शुरुआत में कमजोरी, थकान, सांस लेनी में तकलीफ, आंतो में परेशानी, दस्त, कब्ज की समस्या, मल में लाल या गहरा रक्त आना, वजन का कम होना, पेट दर्द, ऐंठन या सूजन जैसे लक्षण होते हैं। खानपान में फल और सब्जियों को न शामिल करना, फाइबर युक्त आहार न लेना, इस कैंसर के कारण हैं। कैंसर का ट्यूमर चार चरणों से होकर गुजरता है, जिसमें ये बाउल की अंदरूनी लाइनिंग में शुरू होता है। आखिरी स्टेज में ये ब्लड में मिलकर दूसरे अंगों में जैसे फेफड़ों व लीवर में फैल जाता है और इस स्टेज को मेटास्टेटक कोलोरेक्टल कैंसर (एमसीआरसी) कहते हैं।
प्रो. अभिजीत चन्द्रा का कहना है 25 वर्ष की आयु हो जाने के बाद हर तीन से पांच सालों के अंतराल में अपनी नियमित कोलोनोस्कोपी जांच कराते रहें, इससे यह कैंसर एकदम शुरुआत में ही पकड़ा जायेगा, तब इसे ऑपरेशन द्वारा पूरा ठीक किया जा सकता है। यदि आपकी बड़ी आंत में कभी किसी जांच द्वारा पोलिपोसिस नाम की बीमारी की डायग्नोसिस की गई है तो सतर्क रहे।
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