नयी तकनीक की सर्जरी से बिल्कुल ठीक होगा भगंदर

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लखनऊ। भगंदर (फिश्चुला) में नयी तकनीक ने सर्जरी को आैर आसान कर दिया है। तीन नयी तकनीक के प्रयोग बढ़ने से मरीज अब सर्जरी कराना ही बेहतर समझता है आैर बीमारी से जल्द निजात पाना चाहता है। इन नयी तकनीक में लेजर के साथ लिफ्ट (लाइगेशन ऑफ इन्ट्रस्फिट्रक फिस्टुल ट्रेक) व वॉफ्ट (वीडियो असिस्टेड एनल फिस्टुला ट्रीटमेंट) शामिल हैं। इन तकनीक की जानकारी किं ग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में सर्जरी विभाग के विशेषज्ञ डॉ. अरशद अहमद ने दी।
डा. अरशद शनिवार को पीजीआई में आयोजित नयी तकनीक से सर्जिकल कान्फ्रेंस को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने बताया कि मलद्वार के रास्ते में संक्रमण के कारण से फुंसी या फोड़ा बन जाता है। समय पर सही इलाज न होने से संक्रमण अास-पास की मांसपेसियों को जकड़ लेता है। इस बीमारी का अभी तक इसकी सर्जरी कठिन थी। क्योंकि पहले सर्जरी के दौरान मलद्वार के रास्ते की मांसपेसियों को नुकसान हो जाता था । नतीजतन मरीज का शौच से नियंत्रण खत्म हो जाता है।

डॉ. अरशद ने बताया कि नयी वॉफ्ट या लिफ्ट तकनीक के साथ लेजर तकनीक से सर्जरी आसान हो गयी है। सर्जरी के दौरान मांसपेसियों को नुकसान नहीं होता है। यही वजह है कि मरीज ऑपरेशन के बाद सामान्य जीवन व्यतीत कर सकता है। उन्होंने बताया कि लेजर तकनीक से भी सर्जरी आसान हो गयी है।

तीनों तकनीक से सर्जरी में मरीज को भर्ती कम रहना पड़ता हैं। खून का रिसाव कम होता है। संक्रमण का खतरा भी नहीं रहता है। डॉ. अरशद ने बताया कि भगंदर के मरीज समय पर इलाज कराएं। अक्सर सही समय से कई बार दवाओं से भी बीमारी पर काबू पाया जा सकता है। इलाज में देरी पर सर्जरी ही करानी पड़ती है।

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