न्यूज। शुरूआती दौर में ध्यान न देने से लिवर से सम्बधित बीमारियां गंभीर रूप लेती जा रही हैं। इसके कारण हर साल दो लाख लोगों की मौत इन बीमारियां के कारण हो रही हैं, जबकि बीस हजार लोगों को लिवर प्रत्यारोपण की जरूरत पड़ती है, लेकिन केवल 1800 लोगों का ही लिवर प्रत्यारोपण हो पाता है।
बताते चले कि 20 वर्ष पहले अपोलो अस्पताल में भारत का पहला लिवर प्रत्यारोपण हुआ था और जिस बच्चे का यह प्रत्यारोपण किया गया था उस वक्त उसकी उम्र मात्र 18 माह थी। उस बच्चे का नाम संजय कंडासामी था और उसे उसके पिता ने अपनी लिवर दिया था। वह एक दुलर्भ बीमारी बाइलरी एट्रीसिया से पीड़ति था और यह बीमारी बारह हजार में से एक बच्चे को होती है। अब यह बच्चा 21 वर्ष का हो गया है और मेडिकल की पढ़ाई कर रहा है।
देेश के पहले लिवर प्रत्यारोपण की बीसवीं वर्षगांठ के मौके पर अपोलो समूह के चिकित्सा निदेशक और बाल रोग सर्जन डा़ अनुपम सिब्बल ने कहा कि आज का दिन चिकित्सा जगत के लिए बहुत खास है और इस अस्पताल ने अब तक 50 देशों के आए 3200 मरीजों में लिवर का सफल प्रत्यारोपण किया जा चुका है जिनमें 302 बच्चे भी है।
श्रीकंदासामी का कहना है कि वह अपोलो अस्पताल के चिकित्सकों का बहुत आभारी है जिन्होंने उसे नया जीवन दिया था। उसने कहा इन चिकित्सकों की मदद के बिना आज मैं आप लोगों के बीच नहीं होता और इनका शुक्रगुजार रहूूंगा। मैं अपने देश के लोगों का जीवन बचाने में योगदान देना चाहता हूं और लोगों को यही संदेेश देना चाहता हूंं कि जीवन में किसी भी चुनौती को जीतना संभव हैं।
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