स्टेम सेल बैंक की फाइल….

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लखनऊ। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में स्टेम सेल से अलग- अलग विभागों में स्टेम सेल के सहयोग से तमाम बीमारियों पर शोध करने का दावा किया जा रहा है, परन्तु चार वर्षो से स्टेम सेल बैंक की शुरु करने प्रस्ताव की फाइल शासन में दबी चल रही है। यहां के वैज्ञानिकों व डाक्टरों का कहना है कि अगर स्टेम सेल बैंक शुरू कर दिया जाए , तो शोध के अलावा जटिल बीमारियों का इलाज सम्भव हो सकेगा।

केजीएमयू में ब्लड ट्रासंफ्यूजन विभाग ने स्टेम सेल शुरू करने के लिए क्वीन मेरी अस्पताल की मदद से नवजात शिशुओं की एमलाइकल कार्ड एकत्र भी कि ये गये थे। इससे शोध करने में भी मदद मिलने लगी थी। काफी समय तक एमलाइकल कार्ड एकत्र करने के बाद ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग ने स्टेम सेल बैंक शुरू करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। योजना के अनुसार केजीएमयू में शोध को बढ़ावा देने के लिए स्टेम सेल बैंक का आवश्यक बताया गया था। यहां पर ज्यादातर बीमारियों को ठीक करने या शोध कार्य में स्टेम सेल का प्रयोग भी किया जा रहा है। खास कर स्पाइन की बीमारियों में बहुत कारगर साबित हो रहा है। इसके अलावा बैंक बनने के बाद लोगों को निशुल्क एमलाइकल कार्ड करने की सुविधा भी मिल जाती।

इससे यहां पर मरीजों को दोहरा फायदा हो जाता अगर तत्काल किसी के इलाज में स्टेम सेल की आवश्यकता होती तो उसके मैचिंग के स्टेम सेल को दे दिया जाता है। उसके बाद एमलाइल कार्ड देने वाले को भी आवश्यकता होने पर स्टेम सेल दे दिया जाता। इसके बाद भी स्टेम सेल बैंक को हरी झंडी देने की योजना फाइलों में बंद है। लगातार चार वर्षो से बैंक के लिए पदों की स्वीकृत व बजट की मांग फाइल में बंद है। ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग की प्रमुख डा. तूलिका चंद्रा बताती है कि शासन स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद आगे का काम शुरु होगा। अभी तक क्वीन मेरी अस्पताल की मदद से स्टेम सेल को एकत्र करने का ट्रायल किया जा चुका है।


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